सुकून और रोमांच का कॉकटेल है जल महोत्सव...

By Tejnews.com 2017-03-05 सैर     

जब जल महोत्सव का बुलावा आया तो मैंने हमेशा की तरह गूगल पर जाकर यह जानने की कोशिश की कि यह जल महोत्सव होता कहां है? हनुवंतिया के बारे मे मुझे कुछ ज़्यादा पता नही था सिवाए इसके की यह मध्य प्रदेश में है कहीं इंदौर के पास। मैं क्योंकी एक फोटोग्राफर हूं तो मेरी रिसर्च फोटोग्राफ से ही शुरू होती है। गूगल पर कुछ तस्वीरें देखीं तो थोड़ी जिज्ञासा जागी, तो सोचा क्यूं न यू ट्यूब पर वीडियो भी देख लिया जाए।

जब यू ट्यूब पर देखा तो कुछ ज़्यादा नहीं मिला एक वीडियो थी जो किसी नौसिखिए ने फोन से बना कर डाली होगी। उसे देख कर तो एक बार सोच मे ही पड़ गई की जाऊं की न जाऊं? क्यूंकि वीडियो मे कुछ खास एड्वेंचर नज़र नही आया। पर मेरे ट्रैवेलर मन ने सोचा कि क्यूं न एक चान्स दिया जाए? और फिर मैंने जल महोत्सव मे जाने का मन बना लिया। यहां से फ्लाइट से इंदौर पहुंची और इंदौर से टेक्सी से हनुवंतिया की ओर रवाना हो गई। इंदौर से निकलते ही कुछ आगे जाने पर खूबसूरत वन क्षेत्र शुरू हो जाता है।

मध्य प्रदेश के पास अतुल्य वन संपदा है। यहां इस हिस्से में विंध्याचल पर्वत श्रंखला का कुछ भाग पड़ता है जो की एक सुन्दर घाट बनाता है। पहाड़ों को काटती हुई सड़कें कहीं बहुत गुमावदार और बहुत सारे अंधे मोड़ अपने मे समेटे हुई थी। आस पास बहुत कम ऊंचाई वाले पहाड़, विंध्याचल पर्वत माला को उसकी कम ऊंचाई से आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है, कहते हैं कि जब अगस्त्या ऋषि दक्षिण की ओर यात्रा करने निकले तो विंध्याचल पर्वत माला ने झुक कर उनका मार्ग प्रशस्त किया। ऐसी ना जाने कितनी कही अनकही कहानियां हमारे देश के आंचलों में ऐसे ही मिल जाया करती हैं।

खैर हम बात कर रहे थे जल महोत्सव की जोकि हर साल हनुवंतिया टापू पर मनाया जाता है। हनुवंतिया टापू खंडवा जिले मे पड़ता है। यहां पास ही इंदिरा सागर डेम है। और आपको जान कर हैरानी होगी कि यह जलाशय देश का सबसे बड़ा पानी का रिज़र्वायर है। आप जब इसे देखेंगे तो यह समुद्र जैसा नज़र आएगा। कोई सोच भी नही सकता है कि सन् 1984 से पूर्व इस क्षेत्र मे पानी की कमी थी। और आज जहां पानी का इतना बड़ा ख़ज़ाना है जिसकी गहराई लगभग 300 से 400 फिट है वहां कभी गांव हुआ करते थे। इस क्षेत्र की प्रगति के लिए नर्मदा नदी पर इंद्रा सागर डेम बनाया गया। और फिर यहां पानी को कोई कमी न रही और आज हालत यह है कि इस बैक वॉटर्स मे जल महोत्सव मनाया जाता है। जिसमे वॉटर स्पोर्ट्स किए जाते हैं। इन वॉटर स्पोर्ट्स को इंजोय करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

मुझे भी वॉटर स्पोर्ट्स पसंद हैं और जिसकी तलाश में मैंने भारत की अलग-अलग दिशाओं के बीचों की यात्रा भी की हैं जैसे पश्चिम मे गुजरात का मांडवी बीच से लेकर मुंबई, गोआ और केरला तक के बीच और पूरब मे बंगाल के मंदारमनी से लेकर पॉन्डिचेरी और चेन्नई तक के बीच का चक्कर लगाया है पर कहीं भी मुझे वो साफ नीला पानी नही मिला जिसकी कि मैं कल्पना करती थी। इन सभी बीचों पर पानी का रंग नीला नही है, कहीं कहीं तो पानी इतना काला है कि पानी में जाने का मन ही नही किया मेरा। और जब मैं यहाँ हनुमंतिया पहुँची तो देखा यहां इतना पानी है जैसे कि समुद्र हो। और पानी का रंग साफ नीला चमचमाता हुआ देख कर दिल खुश हो गया।

हनुवंतिया टापू तक पहुंचने के लिए इंदौर से 3 से 4 घंटों का समय लगता है। रोड अच्छी है इसलिए बिना किसी असुविधा के मैं हनुवंतिया पहुंच गई। यहां पर ही जल महोत्सव का आयोजन किया गया है। यह एक सुंदर टापू है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने 20 करोड़ रुपया खर्च करके विकसित किया है। यहाँ कुछ पर्मानेंट कॉटेज हैं और जल महोत्सव के लिए खास तौर पर एक टेंट सिटी बसाया जाता है। सैलानी यहां टेंट सिटी में रह कर वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद उठा सकते हैं।

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