चक्रवर्ती सम्राट अशोक की कुछ रहस्यमयी बातें जिन्हें शायद ही आप जानते हों

By Tejnews.com Sun, Nov 20th 2016 व्यक्ति-ब्लॉग     

भारत के इतिहास में 304 ईसापूर्व से 232 ईसापूर्व तक अखंड भारत के राजा रह चुके सम्राट अशोक के बारे में कई ऐसी जानकारियाँ आज भी लोगों को ज्ञात नहीं हैं, जो रहस्य से भरी हैं। अखंड भारत की स्थापना करने वाले प्रथम सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र और सम्राट बिंदुसार के दुसरे पुत्र अशोक ही मौर्य वंश के आखरी शासक हुए।
इतिहास की बात करे तो गुप्तवंश या जिसे मौर्यवंश भी कहते हैं भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य हुआ। मौर्यवंश के दौरान ही भारत अपने स्वर्णिम दौर में था और जब सम्राट अशोक ने राज्य संभाला तो भारत उस वक्त दुनिया का सबसे समृद्ध देश हुआ करता था।
सम्राट बिन्दुसार और रानी सुभ्द्रांगी (रानी धर्मा ) के पुत्र अशोक को अपने सम्राट बनने के मार्ग में खुद के भाइयों से कई युद्ध करने पड़े थे, लेकिन सम्राट अशोक के शासन ने ही भारत को विश्वशक्ति के रूप में प्रस्तुत कर दिया था। सम्राट अशोक को देवनाप्रिय (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) भी कहा जाता था।
देवनाप्रिय इस शब्द का सही अर्थ देवों का अप्रिय होने वाला होता हैं। सम्राट अशोक को पुरे भारतीय इतिहास में सबसे हिंसक राजा माना जाता हैं इसलिए उन्हें देवनाप्रिय कहा जाने लगा. लेकिन कलिंग में हुए सबसे क्रूर युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा की ओर कदम बढ़ा कर बौद्ध धर्म के अनुयायी बन गए थे। अशोक ने जहां-जहां भी अपना साम्राज्य स्थापित किया, वहां-वहां अशोक स्तंभ बनवाए। उनके हजारों स्तंभों को मध्यकाल के मुस्लिमों ने ध्वस्त कर दिया।
अशोक के समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर, कर्नाटक तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफगानिस्तान तक पहुंच गया था। यह उस समय तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य था।
अशोक महान ने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा श्रीलंका, अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया, मिस्र तथा यूनान में भी करवाया। बिंदुसार की 16 पटरानियों और 101 पुत्रों का उल्लेख है। उनमें से सुसीम अशोक का सबसे बड़ा भाई था। तिष्य अशोक का सहोदर भाई और सबसे छोटा था। भाइयों के साथ गृहयुद्ध के बाद अशोक को राजगद्दी मिली।
1. नौ रत्न का रहयस्य:-
कहते हैं कि सम्राट अशोक ने ही अपनी सभा में नौ रत्न रखने की परंपरा की शुरुआत की थी, जिसका पालन आगे कई राजा भी करने लगे। सबसे प्रसिद्ध मुग़ल राजा अकबर ने सम्राट अशोक की कई नीतियों को अपने शासनकाल में अपनाया था। नौ रत्न की इस परंपरा में रहने वाले लोग कई तरह के विचारक और विद्वान हुआ करते थे, जो राजा को सुशासन के लिए मार्गदर्शन करते थे लेकिन वे सभी नौ लोग पूरी तरह से गुप्त होते थे।
2. ज्ञान से भरपूर गुप्त किताब:-
सम्राट अशोक अपने शासनकाल में नौ रत्नों से मिली हर तरह की जानकारी या ज्ञान को एक पुस्तक में दर्ज़ करवा लेते थे ताकि आगे यदि आवश्यकता पड़ने पर उस ज्ञान का इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन वह पुस्तक भी हर किसी की पहुच से दूर थी।
3. नौ रत्नों की शक्ति:-
सम्राट अशोक द्वारा बनाये गए नौ रत्नों का यह समूह पूरी दुनिया में सबसे शक्तिशाली समूह था। इसमें उपस्थित नौ व्यक्ति के आगे दुनिया का कोई भी व्यक्ति, राज्य या देश टिक नहीं पाता था।
4. सम्राट अशोक की मृत्यु का रहस्य:-
सम्राट अशोक की मृत्यु कैसे हुई और कहा हुई यह बात अभी तक एक रहस्य के रूप में दबी हुई हैं। कई इतिहासकार के अनुसार सम्राट की मृत्यु तक्षशिला में हुई, वही कई का कहना हैं कि सम्राटअशोक ने पाटलीपुत्र में अपनी अंतिम सांस ली थी।
5. सम्राट अशोक का स्वर्णिम दौर:-
अर्थशास्त्री कहते हैं कि सम्राट अशोक के शासन के दौरान भारत की अर्थ व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में 35% की भागीदारी रखती थी। लेकिन सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद भारत का पतन शुरू हुआ और मुग़ल एवं अग्रेज़ों के समय तक 1947 में मात्र 4% तक रह गयी।
6. जातिवाद:-
सम्राट अशोक के सुशासन और उनकी ऊँची सोच के चलते ही उनके शासनकाल में जातिवाद जैसी कोई प्रथा नहीं थी। शासन की दृष्टि में सभी कोई एकसमान थे।
7. सबसे युवा सम्राट:-
इतिहास के अनुसार सम्राट अशोक का शासनकाल लगभग 40वर्ष से भी अधिक का था, इस हिसाब से वह बहुत कम उम्र में राजा बने थे. हालांकि सम्राट अशोक के दादा सम्राट चन्द्रगुप्त मोर्य भी बहुत कम उम्र में राजा बन गए थे लेकिन अखंड भारत का सम्राट बनने में उन्हें कुछ समय लगा था। वही अशोक जब सम्राट बने तब वह युवक ही थे इसलिए वह सबसे युवा सम्राट कह लायें।
इतिहास में ऐसे कई रहस्य है जो भारत में बाहर से आये आक्रान्ताओं ने बदल दिए लेकिन यह ज़रूर कहा जा सकता हैं कि भारत का वह दौर स्वर्णिम दौर था। मौर्यवंश और सम्राट अशोक का दौर ही ऐसा दौर था जब भारत सचमुच में सोने की चिड़िया कहलाया था।

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