यहां रात में रुकने पर इन्सान बन जाता है पत्थर:- जानिए इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में

By Tejnews.com Sun, Nov 20th 2016 अजबगजब

सभी जानते हैं कि भारत चमत्कारों और आस्था का देश है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक कई चमत्कारिक मंदिर, दरगाह, गांव, साधु, संत, तांत्रिक और रहस्यमय गुफाएं मिल जाएंगी। अब इसे आप चमत्कार कहें या अंधविश्‍वास, लेकिन एक शहर में एक ऐसा भी स्थान हैं, जहां जाकर लोग हमेशा-हमेशा के लिए पत्थर बन जाते हैं।
कोई कहता है कि इस शहर पर किसी भूत का साया है तो कोई कहता है कि इस शहर पर एक साधु के शाप का असर है, यहां के सभी लोग उसके शाप के चलते पत्थर बन गए थे और यही वजह है कि आज भी उस शाप के डर के चलते लोग वहां नहीं जाते हैं। लोगों में अब वहम बैठ गया है।
राजस्थान का रहस्यों की दुनिया से गहरा रिस्ता है। अगर आप राजस्थान के बाड़मेर के किराडू मंदिर (Kiradu temple) में जायेंगे तो यहाँ की खूबसूरती को देखकर ही हैरान रह जायेंगे। इसे राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है। इस मंदिर में जिस तरह से पत्थर की नक्काशी की गयी है वह अपने आप में ही हैरान कर देने वाली है।
जमीन में दफन शापित नगरी



देश में ऐसे कई गांव हैं, जहां के लोग किसी साधु के शाप के चलते पत्थर बन गए थे। मध्यप्रदेश में देवास के पास गंधर्वपुरी है तो राजस्थान में बाड़मेर के पास किराडु शहर। आखिर क्या सच है किराडु शहर का? क्यों आज भी लोग इस गांव में जाने से डरते हैं और क्यों शाम होते ही यह शहर भूतों का स्थान बन जाता है।

राजस्थान की धरती में कई राज़ दफन हैं। आपने भानगढ़ का किला अपने भूतहा रहस्यों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां भानगढ़ के बाद यदि किसी चीज़ से लोगों को डर लगता है तो वह है किराड़ू मंदिर। वैसे यहाँ आने वाले लोग बताते हैं कि मंदिर एक तरफ चमत्कारी भी है तो दूसरी तरफ यह श्रापित भी है। कहते हैं कि दिन ढ़लने के बाद जो भी इस स्थान पर रूकता है वो पत्थर बन जाता है या उसकी मौत हो जाती है। स्थानीय लोगों के बीच खजुराहो मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर प्रेमियों को विशेष आकर्षित करता है लेकिन शाम ढ़लने के बाद यहां रूकने की आज तक किसी की भी हिम्मत नहीं हो पाई है।
किराडू मंदिर चमत्कारी इसलिए है क्योकि यहाँ जाने से आपकी हर मुराद पूरी हो जाती है तो वहीं अगर कोई व्यक्ति यहाँ रात के समय जाता है तो वह पत्थर का बन जाता है। वैसे किराडू मंदिर कुछ 900 साल पुराना बताया जाता है। मंदिर की खास बात यह है कि वह दक्षिण भारतीय शैली में बना है। आप अगर इस मंदिर में जाना चाहते हैं तो आपको बाड़मेर से 43 किलोमीटर दूर हात्मा गांव तक जाना होगा।
आसपास के लोगों के अनुसार यह मंदिर श्रापित है इसलिए ऐसा होता है। कहा जाता है कि 1161 ईसा पूर्व इस स्थान का नाम किराट कूप था। मंदिर में कुछ दिनों के लिए एक साधू अपने कुछ शिष्यों के साथ रहने आये थे। कुछ दिन आराम करने के बाद गाँव वालों को कुछ दिन उसके शिष्यों का ख्याल रखने के लिए बोलकर साधू भ्रमण के लिए निकल गए। देखभाल के अभाव में उनके शिष्य बीमार पड़ गये थे। जब वह शिष्य बीमार पड़े तो किसी ने भी उनकी सेवा नहीं की और अंत में एक कुम्हार औरत ने उन लोगों की सेवा कर सबकी जान बचाई।
जब साधू भ्रमण से लौटकर आये तो शिष्यों से उनकी हालत का कारण पूछा। जब साधू को यह सब पता चला तो उन्हें काफी क्रोध आया। उन्होंने तब सारे गॉव को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया और साथ ही साथ मंदिर को भी श्राप दिया कि जो भी यहाँ रात के समय रुकेगा वह भी पत्थर का बन जाया करेगा। लेकिन साधू ने उस औरत को बचने का आशीर्वाद दिया। उस औरत को बोला गया था कि वह गाँव से चली जाये और कभी भी पीछे मुड़कर ना देखे। लेकिन उस औरत ने पीछे मुड़कर देखा इसके चलते वह भी पत्थर की बन गयी। वहाँ आज भी पास के गाँव में उस औरत की मूर्ति है और लोग उसे पूजते भी हैं।
यहां मुख्यत: पांच मंदिर है जिसमें से केवल विष्णु मंदिर और सोमेश्वर मंदिर ही ठीक हालत में है। बाकी तीन मंदिर खंडहरों में बदल चुके हैं।
खजुराहो के मंदिरों की शैली में बने इन मंदिरों की भव्यता देखते ही बनती है। हालांकि आज यह पूरा क्षेत्र विराने में बदल गया है लेकिन यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इन मंदिरों को क्यों बनाया गया और इसके पीछे इनका इतिहास क्या रहा है इस सब पर शोध किए जाने की आवश्यकता है। इस मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।

https://youtu.be/bTxHdwYlhSk

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