प्रेमनाथ मल्होत्रा

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

द शोमैन राज कपूरजी जिस सख्स। के साथ पहली बार रीवा आये और दोस्ती को रिश्तेदारी मे बदली वही सख्सप प्रेमनाथ है। कपूर परिवार की दूसरी पीढ़ी मल्होत्रा परिवार की ही देना मानी जाती है। प्रेम नाथ मल्होत्रा का रीवा से मुबई जाना और फिर राज कपूर का रीवा आना श्रीमती कृष्णा के साथ प्रेम की बागडोर मे बंधने की कडी जोडती है। अभिनेता प्रेमनाथजी के पिता साहब करतार नाथ मल्होत्राजी चाहते थे कि प्रेम कले1टर बने लेकिन कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था। अपने अभिनय के बलबूते प्रेमनाथ, हास्य अभिनेता राजेन्द्रनाथ और नरेन्द्रनाथ नें फिल्मी सिने मे जगह बनाई और रीवा को माया नगरी मुबंई में जगह दिलाई।
हिन्दी सिनेमा में प्रेमनाथजी को एक ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाते है जिन्होंने नायक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री पर राज करने के बावजूद खलनायकी को नया आयाम देकर दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोडी। पचास के दशक में प्रेमनाथजी ने कई फिल्मों में नायक की भूमिका निभाईं और इनमें कई हिट भी रहीं लेकिन उन्हें रास नहीं आई। उन्होंने खलनायक की भूमिकाएं निभाने को तरजीह दी। प्रेमनाथजी की भूमिकाओं की विशेषता यह रही है कि उन्होंने जितनी भी फिल्मों मे अभिनय किया उनमें हर पात्र को एक अलग अंदाज में दर्शको के सामने पेश किया। अपनी हर भूमिका में नये तरीके से संवाद बोलते नजर आये। खलनायक का अभिनय करते समय प्रेम नाथ उस भूमिका में पूरी तरह डूब जाते थे। उनका गेट अप हमेशा अलग तरीके का होता था। रंगमंच से फिल्मों के रपहले पर्दे तक पहुंचे प्रेम नाथ ने करीब तीन दशक में लगभग 100 फिल्मों में अभिनय किया। आज के दौर में कई कलाकार किसी अभिनय प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर अभिनय जीवन की शुरुआत करते है।
जीवनवृतांत
प्रेमनाथजी का जन्म २१ नवंबर १९२६ को पेशावर (पाकिस्तान) में हुआ और बटवारे के बाद यह मध्यप्रदेश में आकर बस गये। प्रेमनाथ के पिता श्री रायबहादुर करतारनाथ मल्होत्रा पुलिस के बडे अफसर थे इसलिए इनका बचपन कई अधिक शहरों में बीता। उसी दौरान प्रेम नाथ अपने पिता के साथ सिविल लाइन के पुलिस अधीक्षक बगले में कई वर्षो तक निवास किया और कला के गुर सीखे। कहते है, प्रेम नाथ को बचपन के दिनों से ही अभिनय का शौक था। इसी वजह १९४४ मे लंदन जाने की वजाय प्रेमनाथ पृथ्वी राजकपूरजी के पास मुबई चले गये और पृथ्वी थियेटर में अभिनय के गुर सीखे। वर्ष १९४८ मे उन्होंने फिल्म अजित से फिल्मी जीवन की शुरुआत की लेकिन इस फिल्म से दर्शको के बीच वह अपनी पहचान नहीं पाये। फिल्म अजीत भारत की दूसरी कलर फिल्म थी। वैसे देखा जाय तो अजीत १६ एम.एम में सूट होकर ३५ एम.एम में परिवर्तित होने वाली पहली कलर फिल्म थी।
वर्ष १९४८ में फिल्म आग और १९४९ राज कपूरजी की ही फिल्म बरसात की सफलता के बाद प्रेमनाथ कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये। इसके बाद तो उन्हें बडे-बडे बैनर की फिल्में में काम किया। वर्ष १९५३ में फिल्म औरत के निर्माण के दौरान प्रेमनाथजी का झुकाव अभिनेत्री बीना राय की ओर हो गया और बाद में उन्होंने उनके साथ शादी कर ली। करीब तीन दशक तक अपने दमदार अभिनय से दर्शको के दिल में अपनी खास पहचान बनाने वाले प्रेमनाथजी ३ नवंबर १९९२ को इस दुनिया को अलविदा कह गये।
पी.एन फिल्सक
अभिनेता प्रेमनाथजी नें अपनी धर्मपत्नी बीना राय के साथ मिलकर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। प्रेमनाथजी और बीना राय ने पी.एन फिलम्स बैनर की स्थापना की। इस बैनर के तले उन्होंने गूफा, प्रिनर ऑफ गोलकुंडा, समुंदर और वतन जैसी फिल्मों का निर्माण किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स आफिस पर सफल नहीं हुई और प्रेमनाथ को काफी नुकसान उठाना पडा। इसके बाद अभिनेता प्रेमनाथ ने फिल्म निर्माण से तौबा कर अपना ध्यान अभिनय की ओर लगाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक कई सुपर हिट फिल्में की।
खलनायक की भूमिका

प्रेमनाथजी ने अंजान १९५६ समुंदर १९९७ जागीर १९५९, पठान १९६२, रूस्तम सोहराब १९६३, सिकंदरे आजम १९६५ जैसी फिल्मों में अभिनय किया और उनकी फिल्में सफल की। लेकिन इसके बाद प्रेम नाथ ने खलनायक की भूमिकाएं निभानी शुर कर दी। इन फिल्मों में तीसरी मंजिल १९६६, जॉनी मेरा नाम १९७० धर्मात्मा १९७५, विश्वनाथ १९७८ और कर्ज १९८०0 जैसी सुपरहिट फिल्में भी शामिल है। इनमें उन्होनें शम्मी कपूर, देवानंद, फीरोज खान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नामचीन कलाकारों के साथ काम किया और अपनी अदाकारी का जौहर दिखाकर सिक्का जमाया। प्रेमनाथ के पसंद के किरदारों की बात करें तो उन्होंने सबसे पहले अपना मनपसंद और कभी नहीं भुलाया जा सकने वाला किरदार १९७० में प्रर्दशित फिल्म जॉनी मेरा नाम में निभाया जो दर्शकों को काफी पसंद आया। गोरा और काला १९७२, लोफर १९७३, प्राण जाये पर वचन ना जाये, अमीर गरीब १९७४ तथा संन्यासी १९७५ जैसी कई सफल फिल्मों के जरिये दर्शकों के बीच वह अपनी विशिष्ट पहचान बनाते गये। वर्ष १९७५ में प्रर्दशित फिल्म धर्मात्मा में प्रेम नाथ के अभिनय का नया रूप दर्शकों को देखने को मिला।
अंग्रेजी फिल्म गॉडफादर से प्रेरित इस फिल्म में प्रेम नाथ ने अंडरवल्र्ड डॉन के अपने किरदार धरमदास धर्मात्मा को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। बाद में इसी फिल्म से प्रेरणा लेकर अंडरवल्र्ड पर कई अन्य फिल्में भी बनाई गई। अभिनेता के रूप में स्थापित करने के लिये उन्होंने अपनी भूमिकाओं में परिवर्तन भी किया। इस क्रम में १९७० मे प्रर्दशित राजकपूर की सुपरहिट फिल्म बॉबी में उन्होनें फिल्म अभिनेत्री डिंपल कपाडिया के पिता की भूमिका निभाई। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। इसके अलावा उन्हें शोर १९७२, अमीर गरीब १९७४, रोटी कपडा और मकान जसी फिल्मों में भी जानदार अभिनय के लिये फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। अस्सी के दशक में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण प्रेम नाथ ने फिल्मों में काम करना कुछ कम कर दिया। इस दौरान उनकी कर्ज १९८०0, क्रोधी १९८२, और देशप्रेमी १९८२ जैसी फिल्में प्रदशत हुई। वर्ष १९८५ में प्रदर्शित फिल्म हम दोनो उनके सिने कैरियर की आखिरी फिल्म थी।
सफल चरित्र अभिनेता के इस दौर में प्रेमनाथजी ने जिन फिल्मों में अपनी अदाकारी के जौहर दिखाए उन में से कुछ को ही याद करें तो भी कितनी सारी फिल्में गिनी जा सकतीं हैं। अमीर गरीब, धरम करम, इश्क इश्क इश्क, प्राण जाये पर बचन न जाये, नागिन, दस नम्बरी, पहचान, चला मुरारी हीरो बनने, आप बीती, जानेमन, कबीला, हीरालाल पन्नालाल, शालीमार, गौतम गोविन्दा, जानी दुश्मन, चांदी सोना, क्रोधी, देशप्रेमी इत्यादि।
निर्माता निर्देशक
निर्देशक के साथ उनकी जोडी मशहूर निर्माता निर्देशक सुभाष घई ्के साथ काफी सराही गई। सुभाष घई के साथ उन्होंने कालीचरण, विश्वनाथ, गौतम गोविंदा, कर्ज और क्रोधी जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया। इसके अलावा राजकपूर, देवानंद और मनोज कुमार की फिल्मों में भी उनका अहम योगदान रहा। हिन्दी फिल्मों के अलावा प्रेम नाथ ने अमरीकी टेलीविजन के सीरियल माया में एक छोटी सी भूमिका निभाई। इसके अलावा अमरीकी फिल्म कीनर में भी उन्होंने अभिनय किया।
प्रमुख फिल्में
दौलत के लिए, अजीत आग बरसात हिन्दुतान हमारा हे राम बादल आन साकी औरत समुंदर अपना घर सिकंदर ए आजम आम्रपाली तीसरी मंजिल प्यार मोह4बत बहारो के सपने जॉनी मेरा नाम वफा बेईमान गोरा और काला शोर राजा रानी मोम की गुडिया छुपा रूस्तम नफरत बॉबी प्राण जाये पर वचन न जाये इश्क इश्क इश्क रोटी कपडा और मकान अमीर गरीब रानी और लालपरी धोती लोटा और चैपाटी दफा 302 धरम करम सन्यासी धर्मात्मा कबीला कालीचरण नगिन जय बजरंग बली टाप बीती दस नम्बरी जनेमन शिरडी के साई बाबा फरिश्ता या कातिल फरिश्ता या कातिल दरिन्दा जादू टोना सत श्री अकाल चला मुरारी हीरो बनने चॉदी सोना शालीमार हीरालाल पन्नालाल विश्वनाथ गौतम गोविन्दा मुकाबला मुकाबला जनी दुश्मन ढोगी गेस्ट हाउस धन दौलत कर्ज क्रोधी देश प्रेमी हम दोनो किशन कन्हैया आदि प्रमुख थी।
पुरस्कार
१९४७ फिल्म अमीर गरीब फिल्म के लिए फिल्म फेयर सर्वश्रेष्ट सहायक अभिनेता पुरस्कार, १९७४ रोटी कपडा मकान फिल्म में सर्वश्रेष्ट सहायक अभिनेता पुरस्कार, १९७४ मे बनी फिल्म बॉबी के लिए सर्वश्रेष्ट सहायक अभिनेता पुरस्कार, १९७२ मे फिल्म शोर के लिए सर्वश्रेष्ट सहायक अभिनेता पुरस्कार प्रदान किया गया है।

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