राज और उनकी नायिकाएं

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

द शोमैन राज कपूर की चर्चा उनकी फिल्म मेकिंग स्टाइल के साथ उनकी नायिकाओं के लिए भी होती रही है। यह भी सच है कि भारतीय फिल्मों के महान शो मैन राजकपूर ने पर्दे में अपने आपको ज्यादा प्रोजेक्ट किया है। नायिका बस उसमें शोपीस के लिए होती थीं। राज कपूर की कई चर्चित अभिनेत्रियां रही जिसमें नर्गिस दत्त, बैजंतीमाला, पदमनी, माला सिंन्हा, मंदकिनी, नूतन वाहिदा और डिम्पल आदि। वैजयंती माला के बिना फिल्म संगम की चर्चा अधूरी है। वहीं आवारा् में नर्गिस को भुलाया नही जा सकता। जिस देश में गंगा बहती है में पद्मिनी को और मेरा नाम जोकर में जोकर की तीन नायिकाएं। राज कपूर नें अपनी फिल्मों में दूसरों को नायक बनाया तब भी जीनत अमान, पद्मिनी कोल्हापुरी और मंदाकिनी के खूब चर्चा हुई। इन नायिकाओं ने अपनी स्टाईल और पोशाक से काफी प्रभावित किया।
नर्गिस
राज कपूर और नर्गिस की जोडी रोमांटिक जोड़ी के रूप मे जानी गई। आह, बरसात, आवारा, श्री 420 जैसी फिल्मों में राज नर्गिस की जोड़ी सिने दर्शकों को बहुत पंसद की गई। यही वजह रही कि राज कपूर और नर्गिस का वायलेन हाथों में लिए एक रोमांटिक पोज आर.के बैनर का मोनो बन गया। इसके अलावा फिल्म जगत में बहुत से यादगार सीन इस जोडी नें बनाये। इसी सीन में आवारा् के स्वप्न दृश्य और फिल्म बरसात में कश्मीर की वादियों के रोमाटिक दृश्य को भुलाया नही जा सकता। राज कपूर और नर्गिस का प्रेम पर्दे पर भी झलकता था। प्यार हुआ इकरार हुआ, मुझे किसी से प्यार हो गया, दम भर जो उधर मुंह फेरे जैसे कई तराने राज कपूर और नर्गिस के प्यार की अभिव्यक्ति है। राज कपूर की फिल्मों में नर्गिस बहुत सम्मान के साथ पर्दे पर आई। राज कपूर और नर्गिस ने लगभग 9 वर्ष में 17 फिल्मों में अभिनय किया। सन् 1956 में फिल्म जागते रहो् का अंतिम दृश्य नर्गिस की विदाई का दृश्य था। रात भर के प्यासे नायक को मंदिर की पुजारिन पानी पिलाती है। फिल्म की वह प्यास सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक थी।
राज कपूर और नर्गिस जिस तरह अपने प्रेम में महान थे, उसी तरह अपने अलगाव में भी निराले थे। ऋषि कपूर के विवाह में 25 वर्ष बाद नर्गिस अपने पति और पुत्र के साथ आर.के स्टूडियो आई थीं। उस यादगार मुलाकात में राज कपूर मौन रहे। यहाँ तक कि राज कपूर की बहुत कुछ बोलने वाली आँखें भी मौन ही रही। कृष्णा जी से नर्गिस ने कहा कि आज पत्नी और माँ होने पर उन्हें उनकी पीड़ा का अहसास हो रहा है। किंतु गरिमामय कृष्णा जी ने उन्हें समझाया कि मन में मलाल न रखें वे नहीं होती तो शायद कोई और होता। राज कपूर के सफल होने में बहुत सा श्रेय कृष्णा जी को जाता है। आज भी वह महिला फिल्म उद्योग में व्यवहार का प्रकाश स्तंभ है।
बैजयंती माला
संगम में बैजयंती माला राजकपूर की हीरोइन थीं। कहते हैं कि इस फिल्म तक आते आते राज को अपनी बढ़ती उम्र का अहसास होने लगा था। शायद इसी की अभिव्यक्ति थी फिल्म का यह गीत मैं क्या करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया, लेकिन राज तो राज थे। उनके बारे में यही कहा जाता था कि वह फिल्म में अपनी हीरोइनों से प्रेम करने लगते थे। ऐसी ही त्रिकोणिय प्रेम में बनी फिल्म थी संगम इसे सिने दर्शको ने खूब सराहा और फिल्म ने सुर्खिया पाई।
बिकनी पहनाई।
नूतन
मसहूर फिल्म अनाड़ी् में नूतन और राज कपूर साथ आये यह फिल्म सफल रही और खूब चली। बाजवूद नूतन के साथ राज कपूर की जोड़ी उतनी हिट नही रही जैसे कि नर्गिस के साथ रही है।
हेमा मालिनी

फिल्म सपनो का सौदागर में पहली बार राजकपूर और हेमा मालिनी की जोडी देखने को मिली। हेमा ने हिंदी फिल्मों में नायिका के रूप मे कदम रखा था। उन्हें नीली आंखों वाला नायक मिला और इस फिल्म सोदागर से हेमा को ड्रीमगर्ल नाम की एक नयी पहचान मिल गई। लेकिन फिर राजकपूर और हेमा की देखने को नही मिली।
पद्ममिनी

दक्षिण की बेहद कामयाब फिल्म अभिनेत्री ने हिंदी फिल्मों की ओर कदम बढ़ाए तो सिने दर्शकों ने उसका जोरदार स्वागत किया। शोमैन राजकपूर ने उसकी काबलियत और प्रतिभा को पहचाना। पद्मिनी उनकी फिल्म श्जिस देश में गंगा बहती है में आई। वह डाकू की बेटी का रोल करती है और भोल-.भाले राज को दिल दे बैठती है। यही पद्मनी फिर मेरा नाम जोकर में भी थीं। पद्मिनी के दोनों अभिनय बहुत सराहे गए। डांस सिक्वेंस या एक्शन में वह लाजवाब थी। जिस देश में गंगा बहती है में उनके संवादों का सिने दर्शकों ने भरपूर मजा लिया। मेरा नाम जोकर में् सिम्मी रिबिन किना और पद्मिनी उनसे अलग-अलग समय में प्यार करती है। पद्मिनी को थोड़ा एक्सपोज भी किया उन्होंने।
वहीदा
तीसरी कसम आर के बैनर की फिल्म नहीं थी। लेकिन शैलेंद्र की फिल्म होने से इसमें आर.के बैनर का पूरा प्रभाव था। इस फिल्म की नायिका वहिदा रहमान थीं। यह फिल्म अपने शुरुआती दौर में बहुत सफल नहीं हुई पर इस जोड़ी को दर्शकों द्वारा सराहा गया।
डिंपल
डिंपल कपाडिया के साथ राजकपूर बतौर फिल्मकार जुडे। उन्होंने डिंपल को लेकर बॉबी फिल्म बनायी। इस फिल्म में डिंपल के नायक ऋषि कपूर थे। बॉबी फिल्म में राज कपूर ने डिंपल कपाडिया पर वह दृश्य फिल्माया जो सच में उनके साथ नर्गिस को लेकर घट चुका था।
जीनत
जीनत अमान वैसे हरे राम हरे कृष्णा के लिए देवानंद की खोज हैं लेकिन राज कपूर ने उन्हें सत्यम शिवम सुंदरम में अलग तरह से प्रस्तुत किया।
मंदाकिनी
द शोमैन राज कपूर ने अपने छोटे बेटे राजीव कपूर के साथ मंदाकिनी को लेकर राम तेरी गंगा मैली् फिल्म बनाई। इस फिल्म की नायिका मंदाकिनी का नाम था गंगा। गंगा के इस रूप को देखने के लिए दर्शकों ने कई बार फिल्म देखी। राम तेरी गंगा मैली की सफलता के साथ ही नायिका मंदाकिनी के कैरियर को भी उडन मिल गई।
तूझे बुलाई मेरी बांहे......
राजश्री
राजकपूर और राजश्री की एक फिल्म आई थी एराउंड द वर्ल्ड। राजकपूर की फिल्मों में अमूमन लताजी ही गीत गाती थीं। लेकिन यहां शंकर जयकिशन ने शारदा से गीत गंवाए। फिल्म का गीत.संगीत बेहद चर्चित हुआ। यहां राज अलबेले थे तो राजश्री अपने अल्हड़ सौंदर्य के साथ। राजश्री पर आधुनिक पोशाक खूब जंचे। दुनिया की सैर कर लो काफी चर्चित गाना था।
माला ‌सिन्हा
दीवाना फिल्म में राजकपूर ने अजब सी पोशाक पहनी। ऐसा पहनावा राजकपूर का ही हो सकता था। लेकिन माला सिन्हा अपनी सादगी और सौंदर्य के साथ पर्दे पर नजर आई। दिलकश संगीत संवाद राजकपूर की फिल्मों की विशेषता होती है। चाहे वह आर.के बैनार की फिल्म हो या किसी बाहर के बैनर पर राजकपूर काम कर रहे हो।
साधना
अपने जमाने की जानी मानी अभिनेत्री साधना और राज कपूर ने मात्र एक फिल्म दुल्हा-दुल्हन साथ में की, इस फिल्म का आर.के बैनर से कोई लेना देना नही था। लिहाजा दुल्हा-दुल्हन फिल्म कुछ साख नही कर पाई। साधना के लिए इस फिल्म मे ंकुछ कर दिखाने के लिए खास रोल नहीं दिया गया। जबकि उस जमाने में साधना के जलवे हुआ करते है साधना कि हेयर स्टाईल लड़कियां खूब पंसद किया करती थी। फिल्म को उतनी शोहरत नहीं मिल सकी और ना ही इस जोडी की सिने दर्शको के बीच चर्चा हुई। कहते है कि इस फिल्म में राज और साधना के बीच आपस में बोलचाल नही था। बात जो भी रही हो राज साधना की जोड़ी को सिने दर्शकों ने तब्बजो नही दी।

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