राज कपूर की प्रमुख फिल्में

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

राम तेरी गंगा मैली
बतौर निर्माता, निर्देशक द शोमैन राज कपूर जी को अंतिम छोर में खडे दर्शकों के पसंद कि खूबी थी। अंत तक दर्शकों की पसंद को समझने में कामयाब रहे। 1985 में प्रदर्शित राम तेरी गंगा मैली की कामयाबी से इसे समझा जा सकता है जबकि उस दौर में वीडियो के आगमन ने हिन्दी सिनेमा को काफी नुकसान पहुँचाया था और बड़ी-बड़ी फिल्मों को अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल रही थी। ‘‘राम तेरी गंगा मैली’’ के बाद वह ‘‘हिना’’ पर काम कर रहे थे पर नियति को यह मंजूर नहीं था।
नीलकमल
केदार शर्मा उस समय के नामचीन निर्देशकों में से एक थे। केदार शर्मा ने राज कपूर को क्लैपर ब्वॉय के रूप में भर्ती किया। एक दिन की बात है किसी शॉट को फिल्मा ने के दौरान राज कपूर ने क्लैप को इतनी जोर से टकराया कि अभिनेता की नकली दाढ़ी उसमें फंसकर बाहर आ गई। केदार शर्मा ने गुस्से में राज कपूर को जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया। थप्पड़ ने अपना काम किया और राज कपूर को बाद में केदार शर्मा के निर्देशन में ही श्नीलकमल मिल गई। इस फिल्म में मधुबाला उनकी नायिका थीं।
संगम

राज कपूर द्वारा निर्देशत फिल्म संगम 1 जनवरी 1964 को रिजीज हुई। इस फिल्म में सुंदर राधा से प्यार करता है लेकिन वह उसे अस्विकार करती है वह उसके लिए खुद को योग्य साबित करने का फेसदा करता है और भारतीय वायु सेना मे जाता है जबकि उसका जीवन मोड लेता है जब प्रेम पत्र पाता है। इस फिल्म के संगीतकार शंकर जाय किशन, जय किशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिह रघुवंशी थे
1 बोल राधा बोल 2. दोस्त दोस्त ना रहा 3. हर दिल जो प्यार करेगा प्रमुख गाने थे।
आवारा
राज कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म आवारा 1951 में निर्मित हुई इस फिल्म में एक अल्पकालीन धूर्त पहचान जान लेने पर अपने मालिक की हत्या कर देता है। उसे पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और अपने आपको पिता अदालत में सामने निर्दोष साबित करना होता है। फिल्म की पटकथा खवाजा अहमद अब्बास ने की और फिल्म के संगीतकार थे जय किशन दया भाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी। 1951 में आई आवारा मे मानो बरसात के मतवालो को मदमस्त कर दिया हो। आवारा ने माननीय संवदेनाओं और सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति फिल्म थी। यह फिल्म भारतीय फिल्मों के इतिहास का सुनहरा और भव्य सुन्दर पन्ना है। आवारा ने लगभग आधी दुनिया को राजजी के लिए आवारा बना दिया। इस आवारा मे खुद को देखने लगा यह सब के लिए ऐसी फिल्म थी जिसे उनको कुछ न कुछ अपना वजूद झलकता था। किसी को खुशी तो किसी को गम तो किसी को उम्मीद सबके लिए कुछ ना कुछ इस फिल्म मे है।
आवारा फिल्म है तो सबके बडे रूपयों की जमाने वाली फिल्म भी है ऐसी रूपने जिसमें सब खोए रहना चाहते है। आधी दुनिया आवारा हूं आवारा हूं गा रही थी अब जैसे देश में आज भी आवारा हूं उतनी ही सिदद्त के साथ गाया जा रहा जिसे उस समय गया जा रहा था।
मेरा नाम जोकर

1970 मे निर्मित फिल्म मेरा नाम जोकर की कहानी बडी दिलचस्प है। बचपन से राजू दिल के मामलों में कई बाधाओं और निराशाओं का सामना करता है। लेकिन सर्कस में जोकर के रूप में उसे खुद के ही दुख की कीमत पर अपने दर्शकों को हंसाना होता है। यह फिल्म प्रारंभिक रूप में 18 दिसंबर 1970 मे रिलीज हुई इसके निर्देशक राज कपूर थे इस फिल्म की अवधि 4 घंटे 15 मिनट की थी। इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार एवं सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पुरस्कार मिले। फिल्म के मुख्य गीत अंग लग जा बालमा, काटे न कटे रैना, तीतर के दो आगे तीतर आदि थे।
श्री 420

1955 फिल्म श्री 420 राज कपूर द्वारा निर्मित, राज कपूर और नरगिस अभिनीत व राज कपूर के निर्देशन में बनी है। फिल्म 6 सितंबर 1955 मे रिजीज हुई इसके निर्देशक राज कपूर, संगीतकार शंकर जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी थे और पटकथा रामानन्द सागर की थी। फिल्म को फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ छायाकार का पुरस्कार मिला। फिल्म का प्रमुख गीत दिल का हाल सुने दिलवाला, इचक दाना बिचक दाना, मेरा जूता है जापानी प्रमुख रहा। 1955 मे आई राजजी की यह फिल्म उतनी राजा उस समय की उतनी ही आत भी है उस समय श्याम श्वेत थी तो आज रंगीन हो गई। सपनो के उन मायाजलों को दिखाने वाली यह फिल्म है जिसमे भरोसे चल रही है। सांच रोये खोवा निकाय वाली बात हो चाहे जब लोग कहते है कि देखी कलायुग का तमाशा के दूध बेचाने के लिए दरवाजे दरवाजे भटकना पडता है। और शराब के लिए लोग लाइन लगाये खडे है। श्री 420 दुनिया मे हमेशा के ही आडंबर को दर्शाने वाली फिल्म है। मानव जीवन के जद्दोजहद नये द्वद को दर्शाती यह फिल्म कहती है कि इस दुनिया में सच्चाई से कमाई के रास्ते बंद है और बेइमानी से कमाई के रास्ते है 420।
सडक के किनारे खडे भीख मांग रहे भिखारी और नया नया मुबई आये नायक जानी जे भी कट गई है जो काम की तलाश के महानगर आया है। जब वह भिखारी से काम करता है और भिखारी फिल्म मे नायक से पूछता है पढे लिखे हो मेहनती हो जवना हो ईमानदार भी हो तब यहां काम नही मिलेगा। ये बम्बई है मेरे भाई बम्बई जहां इमारते सीमेंट की बनती है और दिल पत्थर से सच बोलकर भूखा मरना पडता है और बेइमानी से पैस कमाने के रास्ते ही 420। बडा ही करारा उस समय के परिवेश के लिए भी है और आज के भी।
बरसात

1949 की राज कपुर द्वारा निर्देशित फिल्म है। इस फिल्म में राज कपूर और नर्गिस की प्रसिद्ध जोड़ी और प्रेम नाथ ने अभिनय किया है। आर.के की इसी फिल्म और सफलता के चरम को प्राप्त करने वाली फिल्म। आरके का मोनोग्राम बनाने वाली फिल्म प्रेम के उन्भावी उफान से दर्शको को भिगोने वाली फिल्म। गीत संगीत फिल्मांकन सब कुछ अदभुत कलाकारो की कला ऐसी कि अभिनय और हकीकत का कर्ज भी पता न चले। राजजी को निर्माता निर्देशक के रूप मे सर्पित करने वाली फिल्म। संगीतकार शंकर जय किशन गीतकार शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी के जहां यह पहली फिल्म थी वहीं लतामंगेश्कर की पहली फिल्म। जिसके गीत गाये गये और फिर तो लगभग सभी फिल्मो मे लता जी की आवाज रही है। बरसात फिल्म आज भी उस जादू की करती है जिसे राज जी ने किया था। बरसात ने राज जी की पूरी समर्पित कर दिया बाद के वर्षो मे जो भी बनी उसे या तो व्यक्ति स्वयं को किसी कारण से छोडा गया था फिर दुनिया छोडकर चला गया इसके अलावा तीसरा कोई कारण नही रहा। जिसे आर के के मोह बंधन से वह छूटा हो।
आग

1948 फिल्म कानूनी परीक्षा मे फेल व घर से निकाले गए केवल को रंगमंच व जीवन की नायिका मिलेगी क्या। फिल्म 6 अगस्त 1948 को रिलीज हुई इसके निर्देशक राज कपूर थे और संगीतकार राम गांगुली, पटकथा इंदर राज आनंद की थी।
चोरी चोरी

1956 फिल्म लखपति गिरधारी लाल चाहता है कि बेटी की शादी ऐसे शख्स से करे जो दौलत का लोभी न हो। फिल्म 1956 में रिलीज हुई इसके निर्देशक अनंत ठाकुर, पटकथा आगाजानी कश्मीरी, संगीतकार शंकर जयकिशन, जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी थे। इस फिल्म को फिल्मफेयर पुरस्कार एवं सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार मिला।
अनाड़ी
1959 फिल्म के निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी थे, पटकथा इंदर राज आनंद, संगीतकार जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी थे फिल्म 1959 मे रिलीज हुई। राज अपने मालिक की नौकरानी से प्यार करता है पर वह वैसी नहीं है जैसा वह दिखाती है। फिल्म को फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।
जागते रहो

1956 फिल्म में रिलीज हुई इसके निर्देशक सोम्भू मित्रा, अमित माइत्रा, संगीतकार सलिल चैधरी थे। एक मकान में पानी पीने के लिये जाते समय एक किसान को धोखे से चोर समझ लिया जाता है। फिल्म को सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट बंगाली फीचर प्राप्त हुआ। इसके प्रमुख गीत जिन्दगी खवाब है खवाब में झूठ क्या और भला सच है क्या, मैं कोई झूठ बोलेया, जागो मोहन प्यारे आदि प्रमुख थे।
आह
22 मार्च 1953 को रिलीज हुई आह फिल्म के निर्देशक राजा नवाथे, पटकथा इंदर राज आनंद, संगीतकार जयकिशन दयाभाई पंचाल शंकर सिंह रघुवंशी थे। फिल्म में राज रायबहादुर चंद्रा से शादी पक्की करता है परिस्थितिवश चंद्रा शादी तोड़ देती है। फिल्म में जाने ना नजर, झनन झनन झनन, जो मैं जानती, रात अँधेरी दूर सवेरा, आजा रे अब मेरा दिल पुकारा, ये शाम की तन्हाईयाँ, सुनते थे नाम हम जिनका बहार से, राजा की आएगी बारात, छोटी सी ये जिंदगानी आदि प्रमुख थे।
तीसरी कसम
1966 में रिलीज हुई फिल्म तीसरी कसम के निर्देशक बासु भट्टाचार्य थे जबकि संगीतकार जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी, मीनू कात्रक थे। फिल्म को तत्काल बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली थी पर यह हिन्दी के श्रेष्ठतम फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फीचर के लिये दिया गया। फिल्म में आ आ भी जा,
चलत मुसाफिर, दुनिया बनाने वाले प्रमुख गीत थे।
बूट पॉलिश
बूट पॉलिश 1954 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है , 20 अगस्त 1954 यह फिल्म रिलीज हुई। इसके निर्देशक प्रकाश अरोड़ा, पटकथा भानु प्रताप और संगीतकार शंकर सिंह रघुवंशी, जयकिशन दयाभाई पंचाल थे। फिल्म की कहानी इस तरह है वर्षा होने के कारण अब कोई भी व्यक्ति उनसे बूट पॉलिश भी नहीं कराता है और दोनों को भरपेट भोजन भी नसीब नहीं होता है। असहाय बच्चे तब भुखमरी के कगार पर पहुँच जाते हैं जब जॉन चाचा को अवैध शराब बनाने के जुर्म में हिरासत में ले लिया जाता है। फिल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फिल्म का प्राप्त हुआ।
अंदाज
1949 में बनी फिल्म अंदाज के निर्देशक महबूब खान, संगीतकार नौशाद और पटकथा एस० अली रजा की है। इसमें नीना सदमे में जाती है जब उसे पता चलता है की उसका सबसे अच्छा दोस्त दिलीप उसके प्रति लैंगिक दृष्टि से आकर्षित है। लेकिन चीजे बदतर होती है जब उसके पती को शक होता है की इन दोनों में कुछ चक्कर है। फिल्म में झूम झूम के नाचो आज, कोई मेरे दिल में, हम आज कहीं दिल खो बैठे प्रमुख है।
अब्दुल्ला
1980 मे बनी फिल्म अब्दुला एक भविष्यवाणी के अनुसार एक जवान लड़का एक क्रूर अरब डाकू को मारने के लिए बना है। डाकू बच्चे के लिए शिकार करना शुरू करता है वही लडकेे का पुराना संरक्षक और समझदार उसे सुरक्षित रखने के लिए योजना बनाता है। फिल्म के निर्देशक संजय खान, संगीतकार राहुल देव बर्मन और पटकथा कादर खान, जॉर्ज मर्जबेतुनी ने की। फिल्म का प्रमख गीत ए खुदा हर फेसला, भीगा बदन जलने लगा, डांस म्यूजिक आदि है।
छलिया
फिल्म 1960 मे रिलीज हुई है, छलिया शांति से मिलता है तो उसे लगता है कि उसे अपना प्यार मिल गया। पर शांति विवाहित है और कोई रहस्यमय रक्षक उसकी रक्षा करता है। इसके निर्देशक मन्नू देसाई, पटकथा इंदर राज आनंद थे। फिल्म का चुनिंदा गीत छलिया मेरा नाम, तेरी राहो मे खडे है प्रमुख थे। इसके संगीतकार आनंदजी विरजी शाह थे।
कल आज और कल
1 जुलाई 1971 को रिलीज हुई फिल्म कल आज और कल में राजेश लंदन में अपने उच्च अध्ययन पूरा करने के बाद भारत लौटता है। उसे एक पुराने वादे की खातिर रुक्मणी से शादी करने का आग्रह किया जाता है। वह खुद को दुविधा में पाता है क्योकि वह मोनिका के साथ प्यार में है। फिल्म के निर्देशक रणधीर कपूर, पटकथा वीरेन्द्र सिन्हा ने की और संगीतकार शंकर.जयकिशन, जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी ने की। इसका मसहूर गीत आप यहाँ आए किस लिये, भवरें की गुनजन प्रमख गीत थे।
एराउन्ड द वर्ल्ड


1967 मे रिलीज हुई फिल्म एराउन्ड द वर्लड के निर्देशक पाछी, संगीतकार शंकर जयकिशन, जयकिशन दयाभाई पंचाल, शंकर सिंह रघुवंशी और पटकथा पाछी, जगदीश कंवल ने की। फिल्म में एक युवा करोड़पति मझधार मे छोड़ दिया जाता है जब उसका एक कर्मचारी उसकी यात्रा की योजना में गड़बड़ करता है। सिर्फ 8 के साथ जापान में अटक जाता है वह किसी भी तरह एक जहाज पर सवार एक नौकरी प्राप्त करता है।
नीलकमल
24 मार्च 1947 को रिलीज फिल्म नीलकमल में तख्ता पलट के बाद दो राजकुमारियाँ एक अछूत के घर छिपकर रहती हैं। दोनों एक ही व्यक्ति से प्रेम करती हैं और एक आत्महत्या करती है।
फिल्म के निर्देशक केदार शर्मा, संगीतकार बी० वासुदेव और पटकथा केदार शर्मा ने की। इस फिल्म का जय्यो ना बिदेस मोरा जिया भर आएगा, कल जमुना तट पर आओगे, सोचता क्या है सुदर्शन के चलाने वाले आदि प्रमुख गीत थे।
चार दिल चार राहें
चार दिल चार राहें 1959 में बनी इसके निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास, संगीतकार अनिल बिस्वास, साहिर लुधियानवी, पटकथा ख्वाजा अहमद अब्बास, इंदर राज आनंद वी०पी० साठे थे।
दो जासूस
1975 मे बनी फिल्म दो जासूस में दो अनाड़ी जासूस धर्मचंद और करमचंद को आशा एक बहु करोड़पति की लापता बेटी का पता लगाने के लिए नियुक्त किया। इस फिल्म के निर्देशक नरेश कुमार, संगीतकार रवीन्द्र जैन, पटकथा इरशाद ने की।
गोपीनाथ
1948 मे रिलीज हुई फिल्म गोपी नाथ इसके निर्देशक महेश कौल, लतिका संगीतकार नीनू मजूमदार और पटकथा महेश कौल ने की। इसमें राज कपूर, तृप्ति मित्रा, महेश कौल नायक ने अभिनय किया।
श्रीमान सत्यवादी
1960 मे रिलीज हुई फिल्म श्रीमान सत्यवादी के निर्देशक एस.एम. अब्बास थे फिल्म में ईमानदार आदमी ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है। इस कहावत का खुद के बच्चे के चित्त पर प्रभाव डालता है। जब वह बडा होता है तब उसे अकेले ही सच के लिए खुद की लड़ाई लड़ना है। फिल्म के कलाकार थे राज कपूर और नजीर हुसैन।
प्रेम रोग
1982 मे बनी प्रेम रोग फिल्म में देवधर मनोरमा विधवा होने के बाद उसके जीवन में वापस खुशी लाने के लिए कसमें खाता हैं। इससे उसे अपने परिवार और अपने ग्रामीणों के क्रोध का सामना करना पडता हैं। फिल्म 31 जुलाई 1982 को रिलीज हुई इसके निर्देशक राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल थे। फिल्म को फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ। भंवरे ने खिलाया फूल, मैं हूँ प्रेम रोगी, मेरी किस्मत में तू नहीं शायद प्रमुख गीत थे।
बॉबी

1973 में आई आर. के. बैनर की इस फिल्म ने सभी पुराने जख्मो को भर दिया। फिर से आर. के. सफलता की बुलंदियो को छुने लगा, आर.के का परचम चारों तरफ लहराने लगा। युवा प्रेम की यह कहानी हर जुबान पर चढ़ी और सिरचढ़ कर बोली। नायक के रूप में आए राजजी के ऋषि कपूर और नायिका के रूप में आई नया चेहरा डिम्पल कपाड़िया। फिर वही राजजी क&

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