फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

अंदाज के बाद राज कपूरजी ने निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा और ‘‘आवारा’’ 1951 ’’श्री 420’’, 1955 ‘‘चोरी-चोरी’’, ‘‘जिस देश में गंगा बहती’’ है। 1960 जैसी सफल फिल्में बनाईं। इन फिल्मों ने राज कपूर को चार्ली चैपलिन वाली भारतीय इमेज दी।
द शोमैन राज कपूरजी नें अपनी फिल्मों में एक सामान्य व्यक्ति का बखूबी चित्रण किया है। उनकी फिल्मों में मजदूर से लेकर एक आम आदमी को देखा जा सकता था। राज कपूर ने हमेशा आम आदमी के लिए फिल्में बनाई। 1960 के दशक में उन्होंने ‘‘संगम’’ बनाई। जिसके निर्माता-निर्देशक वे स्वयं थे। फिल्म में राजेंद्र कुमार, वैजयंती माला और स्वयं राज कपूर केंद्रीय भूमिका में नजर आये थे। यह उनकी पहली रंगीन और नायक के तौर पर पहली हिट फिल्म भी हुई। इसके कुछ सालों के बाद उन्होंने अपनी महत्त्वाकांक्षी मसहूर फिल्म ’’मेरा नाम जोकर’’ शुरू की, यह फिल्म को बनने में लगभग 6 साल का वक्त और खूब पैसा खर्च हुआ। यह ऋषि कपूर की पहली फिल्म थी। फिल्म 1970 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस फ्लाप रही। राज कपूर के ड्रीम प्रोजेक्ट ने ंबहुत बड़ा झटका दिया। यह फिल्म कि लंबाई करीब पाँच घंटे की थी। अंतराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म की लम्बाई करीब 233 मिनट रखी गई है जबकि भारतीय दर्शकों के लिए इसमें 184 मिनट की फिल्म काट दी गई थी। फिल्म ‘‘मेरा नाम जोकर’’ फ्लाप होने के द शोमैन को बहुत बडा घाटा उठाना पडा। बावजूद इसके फिल्म को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार शंकर जय किशन सर्वश्रेष्ठ निर्देशक राज कपूर सर्वश्रेष्ठ सिने मैटोग्राफी राध करम कर सर्वश्रेष्ठ पाश्व गायक मन्ना डे भाई जरा देख के चलो और सर्वश्रेष्ठ साउंड रिकॉर्डिंग अलाउद्दीन खान कुरैशी को फिल्म फेयर अवार्ड मिला। यह उस समय की मेगा स्टार फिल्म थी। जिसमें राज कपूर के अलावा धर्मेंद्र, मनोज कुमार, सिमी ग्रेवाल, दारा सिंह, पद्ममिनी, राजेंद्र कुमार, अचला सचदेव, ऋषि कपूर और रशियन अदाकारा सोनिया प्रमुख थीं।

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