द ग्रेटेस्ट शोमैन राज कपूर

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

अभिनेता, निर्माता, निर्देशक राज कपूर जी भारतीय फिल्म इतिहास के वह नाम है। जो पिछले आठ दशकों से फिल्मी सिखर की उचाई पर जगमगा रहा है और आने वाले कई दशकों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। जिन्होंने फिल्मों के माध्यम से हिन्दुस्तान की पहचान को वैश्विक क्षितिज में स्थापित किया। जिनके फिल्मों के गीत गुनगुनाने वाले एसिया, रूस, जापान, अमेरिका और अफ्रीका में भी है। श्री राज कपूर जी भारत के साथ पाकिस्तान, चीन जापान और रूस मे भी अत्यधिक लोकप्रिय हैं। श्री राज कपूर को अभिनय विरासत में ही मिला था। इनके पिता पृथ्वीराज अपने समय के मशहूर रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता हुए हैं। श्री राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर ने अपने पृथ्वी थियेटर के जरिए पूरे देश का दौरा किया। राज कपूर भी उनके साथ जाते थे और रंगमंच पर काम भी करते थे। थिएटर के प्रति उनकी दीवानगी स्पष्ट थी। पृथ्वी थिएटर की नाट्य प्रस्तुतियों में सामाजिक जागरूकता के साथ ही देशभक्ति और मानवीयता को प्रश्रय दिया गया। पृथ्वीराज कपूर और राज कपूर जी दोनों को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

जीवनवृत्तांत
पृथ्वीराज कपूर के सबसे बड़े बेटे राज कपूर का जन्म 14 दिसम्बर 1924 को पेशावर (पाकिस्तान) के दक्की मुनव्वरशाह में हुआ था। श्री राज कपूर के दादा विशेषरनाथ कपूर दीवान थे। बंटवारे के बाद परिवार भारत आ गया। उनका बचपन का नाम रणबीर राज कपूर था। राजकपूर की प्रारंभिक शिक्षा कर्नल ब्राडन स्कूल देहरादून व सेंट जेवियर स्कूल में हुई। राज कपूर की स्कूली शिक्षा कोलकता में हुई लेकिन पढ़ाई में उनका मन कभी नहीं लगा। यही कारण था कि राज कपूर ने 10वीं कक्षा की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। ऐसा कहा जाता है कि इस मन-मौजी ने अपने विद्यार्थी जीवन में किताबें बेचकर खूब केले और चाट-पकोड़े खाई।

सन 1929 में जब पृथ्वीराज कपूर मुंबई आए तो उनके साथ मासूम राज कपूर भी आ गए। राज कपूर कि फिल्मो की पहचान उनकी आँखों का भोलापन ही रहा है। पृथ्वीराज कपूर सिद्धांतों के पक्के इंसान थे। राज कपूर को उनके पिता ने साफ कह दिया था कि राजू नीचे से शुरुआत करोगे तो ऊपर तक जाओगे। राज कपूर ने पिता पृथ्वीराज कपूर की इस यह बात को गाँठ बाँध ली और जब उन्हें सत्रह वर्ष की उम्र में रणजीत मूवीटोन में साधारण एप्रेंटिस का काम मिला तो उन्होंने वजन उठाने और पोंछा लगाने के काम से भी परहेज नहीं किया। राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर अपने दौर के प्रमुख सितारों में से थे लेकिन फिल्मों में राजकपूर की शुरुआत चैथे असिस्टेंट के रूप में हुई। राजकपूर नें एक साक्षात्कार में कहा था। पिताजी का नाम मेरे लिए कितना सहायक हुआ यह नहीं मालूम। उन्होंने फिल्मों में मुझे चैथे असिस्टेंट के रूप में भेजा। शायद यही वजह रही कि अपनी फिल्मों के हरेक मामले में उनकी अलग छाप स्पष्ट दिखती है। काम के प्रति राज कपूर की लगन पंडित केदार शर्मा के साथ काम करते हुए रंग लाई जहाँ उन्होंने अभिनय की बारीकियों को समझा। एक बार राज कपूर ने गलती होने पर केदार शर्मा से चाँटा भी खाया था। उसके बाद एक समय ऐसा भी आया जब केदार शर्मा ने 1947 में अपनी फिल्म नील कमल में मधुबाला के साथ राज कपूर को नायक के रूप में प्रस्तुत किया। जीवन के उत्तरार्द्ध मे वे दमे से पीडित थे और यही उनकी मृत्यु का कारण बना। 2 जून, 1988 में फिल्मी दुनिया का महान कलाकार पार्थिव देह छोड़कर स्वर्गीय दुनिया मे चला गया।

Similar Post You May Like

ताज़ा खबर

Popular Lnks