राजेन्द्र की देन राज कपूर आडोटोरियम

By Tejnews.com 2016-02-26 बॉलीवुड     

वो ऑसमा था सिर छुकायें बैठा रहा, कद का गुमा ना हुआ। ये चंद लाइनें फिल्म के महान नायक राज कपूरजी और हमारे जननायक राजेन्द्र शु1ल की उपल4िधयों के लिए कम पड जायेगी। राज भविष्य की चिंता लेकर पहली बार रीवा आये थे और उनका रीवा में उनके लिए किसी प्रताप से कम नही है। कहते है किसी व्यक्ति कि उपल4िध में अर्धागिनी का साथ होता है और कृष्णा-राजजी इसकी मिशाल है। राजजी के भाग्य का सूर्योदय हुआ, उनका सौभाग्य था कि धर्मपत्नी के रूप में श्रीमती कृष्णाजी उन्हे मिली और हमारे जनता का सौभाग्य है कि हमें राजेन्द्र शु1ल जैसा जननेता मिला है।
दुनिया में राज कपूर ऑडिटोरियम और कहीं देखने को नही मिलेगा। लंदन और रूस में लोकप्रियता के चलते सिने प्रेमियो नें राजजी को दिलो में बस है, लेकिन रीवा में तो वह पहुन के रूप में लोकप्रिय है। विन्ध्य का एक संस्कृति रही है कि यहां अतिथियों की खातिरदारी तो होती ही है लेकिन जब पहुन की बात हो यह खातिरदारी यादगार बन जाती हैै। ऑडिटोरियम की सौगात कपूर परिवार को दिये गये किसी तोहपे से कम नही है। ऑडिटोरियम की कल्पना राजेन्द्र शु1जी ने की थी और साकार भी खुद किया है। मध्यप्रदेश ही नही बल्कि देश कि यह बडी उपल4िधयो मे सुमार हो गई है। लंदन में मैड्म मैडम टुसौड्स 6यूजि़यम और रूस मे नागरिक अभिनंदन इस उपल4िध के आगे बौने साबित होगें। मैडम टुसौड्स 6यूजि़यम में राजजी मोम के पुतले के रूप मे देखने को मिलेगें, लेकिन हिन्दुस्तान के इस ऑडिटोरियम में कला प्रेमियो को राजजी जीवांत मिलेगें और लोगों को यहां मानवता, करूणा और प्रेम का पाठ सीखनें को मिलेगा।
रीवा, राज कपूरजी और राजेन्द्रजी इन तीनों का एक गजब का संयोग। राजेन्द्रजी एक शिल्पी के रूप में विन्ध्य मे उभर कर सामने आये है जो आधुनिक सोच से विकास की नित नई गाथा गढने के लिए तैयार है। वर्षो से कला प्रेमी ऑडिटोरियम की कमी महसूस कर रहे थे लेकिन राजेन्द्रजी नें राजकपूर ऑडिटोरियम की सौगात रीवा को देकर कला प्रेमियों को दुनिया में उंची उडान उडने के रास्ते खोल दिये है।

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