भक्तिमय, पौराणिक एवं आध्यत्मिक परंपरा को जीवित रखने के लिए 181 वर्षो से निरन्तर चल रही है रामलीला।

By Tejnews.com 2021-10-13 द बघेली     

रीवा के नृत्व राघव मंदिर में निरंतर 181 सालों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है. भक्तिमय, पौराणिक, आध्यत्मिक और धार्मिक परंपरा को जीवित रखने के लिए यह निरन्तर चली आ रही है। दूर-दूर से श्रध्दालु इसे देखने आते है और देर रात तक रामलीला का रसपान करते है। रीवा रियासत के महाराज रघुराज सिंह ने नृत्य राघव मंदिर में रामलीला कि शुरू की थी. प्राचीन नृत्य राघव मंदिर लगभग 450 वर्ष पुराना है यहाँ भगवान राम की नृत्य करती हुई दुनिया की इकलौती मूर्ति स्थापित है.

ऐसा कहा जाता है की बघेल राजपूत महाराज रघुराज सिंह एक बार काशी विश्वनाथ गए थे और वहां उन्होंने रामनगर के रामलीला का भी दर्शन किया था महाराज को ये रामलीला इतनी पसंद आई की उन्होंने रीवा में करने का संकल्प लिया। उसके बाद रीवा में भी रामलीला का आयोजन शुरू हो गई. महाराज इस आयोजन का पूरा ख़र्चा देते थे, किले की तरफ से हांथी, घोड़े भेजे जाते थे. भगवान श्रीराम हांथी पर सवार होकर नदी स्नान करने जाया करते थे, गाजे बाजे और बहमूल्य पोशाकों का इंतजाम किले की तरफ से किया जाता था. रामलीला समाप्त होने के बाद कलाकारों को सम्मानित भी किया जाता था. ये रामलीला पहले पूरे एक महीने तक चलती थी लेकिन अब नौ दिन होती है. अब इस मंदिर की पूरी जिम्मेदारी सरकार के हांथो में है.

प्रधान पुजारी शीतला शरण पांडेय ने बताया कि 181 सालों से निरंतर नृत्व राघव शरण मंदिर में रामलीला आयोजन चलता आ रहा है. इसकी शुरआत महाराजा रघुराज सिंह ने 1840 ई. में की थी. भारत-चीन युद्ध के दौरान 1962 में देशभर के सांस्कृतिक कार्यक्रमो पर रोक लगा दी गई थी. बावजूद इसके यहाँ रामलीला का मंचन उस अवधि में किया गया. कोविड 19 महामारी के दौरान भी यहां कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। इस आयोजन का रामलीला के कलाकार बेसब्री करते है वह इसे पूर्वजो की धरोहर मानते है और इसे जीवित रखने के लिए पूरा प्रयास कर रहे है. शंकर दयाल सिंह, हनुमान प्रसाद, कुंजलेश्वर तिवारी सहित अन्य कलाकार बताते है कि वह सिफ रामलीला कराना चाहते है इसके अलावा कोई अन्य कार्य नही करते। बचा हुआ जीवन भी रामलीला में समर्पित करना चाहते है।

यहां मंचन कर कलाकार काफी खुश नजर आते है वह इस परंपरा को आगे बढाते चले आ रहे है. नृत्य राघव शरण मंदिर की रामलीला महोत्सव का धर्मानुरागियों, प्रबुद्ध वर्ग और आमजन मानस इंतजार करते है. रामलीला कथा को देखने के लिए दूर दूर से दर्शक आते है.

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