जानिए कहां बनी रीवा रियासत की उपराजधानी, यहां कैसे बना विश्वनाथ सरोबर:

By Tejnews.com 2021-10-10 द बघेली     

व्हाइट टाइगर के ब्रडिंग सेंटर होने से दुनियाभर में रीवा का गोविन्दगढ सुर्खियों में आया था लेकिन क्या आप जानते है यह रीवा रियासत की उपराजधानी का गौरव हासिल करने वाला इलाका भी है। यहां कि तीन खूबियां प्रसिद्ध है, पहला तो दुनियाभर में चर्चित सफेद बाघ, दूसरा सुन्दरजा आम और तीसरा विश्वनाथ सरोबर।
हम बात कर रहे है रीवा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर गोविन्दगढ कस्बे की, यह इलाका सन 1856 में रीवा राज्य की उपराजधानी बना था। यह कैमोर पहाड पूरब से पच्छिम तक कैमोर पहाडी का यह इलाका पथरीली भूमि वाला चटटानों से भरा हुआ था, पहाड से पानी की निकलने वाली धाराओं का मनोहारी दश्य बनाते झरने और खंधों कुंड मौजूद थे। यहां रिसायत के महाराज रघुराज सिंह नें विशाल सरोबर खुदवाने के साथ ही दरिया महल और मंदिर की स्थापना कराई थी। इतना ही गोविन्दगढ में 25 हजार एकड भूमि वन के लिए आरक्षित की गई। ऐसा कहा जाता है कि महारानी रानावट सौभाग्य कुंवरी उदयपुर अक्सर महाराज से मायकें की झीलों का वर्णन किया करती थी। उन्होने बात रखी कि अगर ससुराल में भी ऐसी झील हो तो मायका भूल जायेगा। महाराज रघुराज सिंह अक्सर इस इलाके से गुजरते थे इसी दौरान उनके परिदश्य में गोविन्दगढ आ गया। रानावट महारानी की आरजू पूरी करने के लिए महाराज रघुराज सिंह नें गोविन्दगढ में 1,3 वर्गमील में विशाल सरोबर की स्थापना कराई, यह तालाब प्रदेश में दूसरे नबर का दर्जा रखता है। उत्तर में किला के साथ ही एक मंदिर का निर्माण कराया। किले में हवा महल, संगमरमरी बारादरी, सीपदीप सब अद्वितीय थे।
सरोबर, किला और मंदिर का निर्माण 1856 मे पूरा हुआ था, महाराज रघुराज सिंह ने सरोबर पिता विश्वनाथ सिंह के नाम पर विश्वनाथ सरोबर, रमागोविन्द भगवान के नाम से किला और नये सिरे से बस्ती बसाकर उपराजधानी बनाया। प्रशासनिक कामकाज के लिए बरिष परमिट विभाग खोला, धारा 31 के अनुसार इलाकेदारों को परमिट वसूल करने का हक नही रहा। इसके सुपरिनटेन्डेंट बनाये गये मौलवी अमानअली। महाराज को जबभी वक्त मिलता सुकून के पल बिताने गोविन्दगढ चले जाते थे। सरोबर में उठती लहरे मन मोह लेती थी, महाराज सरोबर में नौकायान कर मनोरम आंनद लेते थे। बारादरी और कठ बंगले में घंटो बैठ रहते थे। किला के दक्षिणी भाग की दीवाल को तुडवा कर गोविन्दगढ तक सडक बनवाई, सरोबर के तट पर सुन्दरजा आम के बाग लगाये गये। गोविन्दगढ किले में ही किलकारियां गूंजी थी, मार्तण्ड सिंह का यहीं जन्म हुआ, खेलकूद कर बडे हुये और व्हाइट टाइगर के लिए यहीं बाघ महल बनाकर ब्रडिंग कराई।
महाराज रघुराज सिह के साथ ही महाराज मार्तण्ड को गोविन्दगढ से बेहद लगाव रहा है। व्हाइट टाइगर मोहन का राजकीय सम्मान के साथ यहां ही अन्तिम संस्कार किया गया और उसकी समाधि बनाई गई थी। वर्तमान में किला जर्जर हो चुका है और बारादरी के संगमरमर चोरी हो गये है साथ ही कठबगला का अधिकांश हिस्सा टूट गया है। जबकि सरोबर की खूबसूरती खज्जियों में दब गई है।

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