बघेली को सशक्त पहचान दिलाई इन्हे कहते है बघेली महाकवि सैफुद्दीन सिद्धीकी सैफू:

By Tejnews.com 2021-10-10 द बघेली     

विन्ध्य की एक ऐसी शख्सियत जिसने कविता, कहानी, पहेलियों और उपन्यास के माध्यम से बघेली को सशक्त पहचान दिलाई। इन्होनें न सिर्फ नए आयाम दिये बल्कि एक सुदृढ काव्य परम्परा भी प्रदान की है। सैफुद्दीन सिद्धीकी सैफू को इसीलिए बघेली का महाकवि कहा जाता है। सैफू का जन्म जुलाई 1923 मेें अमरपाटन तहसील के रामनगर जिला सतना में हुआ था। बाणसागर परियोजना से विस्थापित होने के बाद गढियाटोला सतना मेें बस गये। सैफू स्वभाव से अत्यंत सहज और सरल किन्तु अनुभव मेें सम्पन्न कवि थे। उनके जैसा लोक जीवन का अनुभव बिरले ही पाया जाता है जिसका प्रितफल है।
बघेली बोली की कविताओ, कहानियोें, पहेलियोें और उपन्यास आदि की सात पुस्तकंे है। सैफू की अनेक कविताएं जिनमेें गरीबो मजलूमो और किसानोें की अभाव ग्रस्त जिंदगी का बडा बेबाक वर्णन है। सैफू ख्याति की अंधी दौड़ से अपने आप को अलग रखते हुए ताउम्र बघेली लोक साहित्य सृजन में लगे रहे। सैफू की रचनाओं में गरीब, किसान, सुविधाओं के अभाव जीवन यापन कर रहे मजदूरों की वेदना है। सामाजिक कुरीतियांे, छुआछूत, जातिवाद, दहेज प्रथा, शिक्षा, बाल-विवाह इत्यादि से मुक्ति दिलाने की चेष्टा है।
सैफू के पिता मुंशी नसीरुद्दीन सिद्दीकी एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे। पूरा परिवार शिक्षित घराना था। लिहाजा सैफू को लोक साहित्य सृजन की प्रेरणा विरासत में प्राप्त हुई। सैफू राजस्व विभाग में राजस्व निरीक्षक थे। बघेली महाकवि ने गद्य पद्य दोनोें विधाओें मेें अपनी लेखनी चलाई। रीवा रियासत महाराज मार्तण्ड सिंह के राज दरवार में ससम्मान कविता पाठ हेतु आमंत्रित किया जाता था। सैफू आकाशवाणी रीवा की स्थापना के साथ ही कई वर्षो तक चैपाल कार्यक्रम में कविता पाठ करते रहे। सैफू जी को रुदिया बरी भा अंजोर के लिए साहित्य अकादमी, संस्कृति विभाग द्वारा दुष्यंत कुमार पुरस्कार से भी नवाजा गया है। सैफू की रचनाओं का संसार भरा पडा है लेकिन इसका संग्रह नही हो पाया। जिसके चलते उनकी रचनाओं पाठकों तक नही पहुंच पाई। कला प्रेमी बघेली कवि जगजीवन लाल तिवारी बघेलखण्ड सास्कृतिक महोत्सव समिति के बैनर तले महाकवि की रचनाओं को पुर्नजीवित करने में प्रयासरत है। आने वाले समय में इनकी पुस्तकें पाठको को प्राप्त हो सकेगी।

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