देश का प्रथम हिन्दी नाटक ‘आनन्द रघुनन्दन’’ की शानदार नाट्य प्रस्तुती सम्पन्न

By Tejnews.com 2021-10-10 रीवा रीजन     

रीवा में बघेलखण्ड सांस्कृतिक महोत्सव समिति रीवा द्वारा आजादी की 75वीं वर्षगांठ अमृत महोत्सव के परिपेक्ष्य में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनवरत जारी श्रृंखला के अन्तर्गत बघेल राजवंश के यशस्वी महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव द्वारा रचित देश का प्रथम हिन्दी नाटक ‘‘आनन्द रघुनन्दन’’ जो योगेश त्रिपाठी द्वारा बघेली में रूपांतरित किया गया है जिसका भव्य मंचन आज 27 सितम्बर 2021 को सायंकाल 6 बजे से कृष्णा राजकपूर के ऐतिहासिक अडीटोरियम में मंचित किया गया।
आकार वेलफेयर सोसायटी सतना के कलाकारों द्वारा पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक श्री राजेन्द्र शुक्ल के मुख्य आतिथ्यि एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलपति प्रो.राजकुमार आचार्य की अध्यक्षता में आनन्द रघुनन्दन की शानदार प्रस्तुती दी गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में नाटक के लेखक महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव के वंशज पूर्व मंत्री महाराजा पुष्पराज सिंह एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.दिनेश कुशवाह शामिल रहे। बघेलखण्ड सांस्कृतिक महोत्सव समिति के अध्यक्ष जगजीवनलाल तिवारी एवं हेमन त्रिपाठी ने पुष्पहार से अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन संयोजक डॉ. मुकेश येंगल एवं कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार रामनरेश तिवारी निष्ठुर ने किया।
दीप प्रज्वलन एवं वीणापाणि के चित्र पर माल्यार्पण के बाद अतिथियों के स्थानापन्न होने पर लगभग 185 वर्ष पूर्व लिखे नाटक पर संचालक ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर योगेश त्रिपाठी ने कहा कि यह नाटक नहीं यह महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव द्वारा दिया गया आर्द्धय है। मुख्य अतिथि की आसंदी से अपना उद्बोधन देते हुए पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हमारी कला और संस्कृति अलौकिक है हमें इसे अक्षुण बनाये रखने के लिए काम करना चाहिए। श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा महाराजा का लिखा यह नाटक देश की धरोहर है, विद्वानों ने इसे देश का मौलिक प्रथम नाटक निरूपित किया है यह इस धरती के लिये सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो.राजकुमार आचार्य ने विन्ध्य की विरासत पर विहंगम दृष्टि डालते हुए इसे दुर्लभ और विशिष्ट बताया। उन्होने कहा कि यह नाटक विन्ध्य की धरोहर है जिसे संजोये रखना हम सबका कर्तव्य है। विशिष्ट अतिथि महाराजा पुष्पराज सिंह ने कहा कि इस नाटक के लेखक महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव सीता जी को पुत्री मानते थे उन्होने इस नाटक में श्रीरामचन्द्र जी के वाल्यकाल से लेकर रावण विजय एवं अयोध्या लौटने तक का वर्णन किया है। उन्होने कहा कि यदि इस नाटक का बघेली में दस एपीसोड तैयार हो जाय तो यह अपने आप में एक देश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। डॉ.दिनेश कुशवाह ने अपने ललित शब्दो में नाटक विधा का वर्णन करते हुए आनन्द रघुनन्दन, धु्रवाष्टक तथा कालिदास के साकुंतलम् के अख्यान को रेखांकित किया। उन्होने कहा कि इस नाटक में एक-एक पात्र का अभिनय जीवंत एवं चरित्र को प्रमाणित बनाये रखने की कला में पारंगत होने का प्रमाणिक रूप से देखने को मिला। नाटक के बाद सभी पात्रों ने अपना परिचय नाटक में उद्घृत नाम के आधार पर दिये। नाटक के निर्देशक अमित शुक्ला एवं शुभम बारी तथा संयोजिका अनामिका सिंह और रंगकर्मी योगेश त्रिपाठी का शाला एवं श्रीफल द्वारा मुख्य अतिथि ने स्वागत किया साथ ही 51000/- रुपये की नगद राशि पुरस्कार के रूप में कलाकारों के लिए निदेशक को सौपते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की वही महाराजा पुष्पराज सिंह जी द्वारा कलाकारों को रात्रि भोज दिया गया। इस अवसर पर कृष्णा राजकपूर आडीटोरियम सभागृह खचाखच भरा रहा जिसमें प्रमुख रूप से पी.एन.पाठक, डॉ.चन्द्रिका प्रसाद चन्द्र, डा.प्रभाकर चतुर्वेदी, संतोष अवधिया बृजेश पांडे, रिजाशंकर गिरीश, वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल, हरिश्चन्द्र द्विवेदी, सूर्यमणि शुक्ला, शिवशंकर त्रिपाठी शिवाला, अवधबिहारी पाण्डेय, कमल किशोर कमल, नागेन्द्र मिश्र, कवियत्री रागिनी सिंह, लोक गायिका अर्चना पाण्डेय, सुधाकांत बेलाला, हशमत रीवानी, सीधी से डॉ. शिवशंकर मिश्र सरस, नीरज कुंदेर, रोशनी मिश्रा सहित शहर के बुद्धजीवी, कलमकार, रंगकर्मी, पत्रकार सहित विद्वतजन उपस्थित रहे.

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