बघेलखण्ड में जन्मा था मुगल वंश का बादशाह अकबार:

By Tejnews.com 2020-12-09 द बघेली     

आपको जानकर यह हैरानी होगी कि बादशाह अकबर द्वितीय का जन्म बघेलखण्ड में हुआ था। इतना ही नही रियासत के महाराज अजीत सिंह नें बादशाह और उसकी मां को प्रश्रय दिया था। गढी में और बादशाह की हिफाजत की। अब इसी इलाके में दुनिया की इकलौती व्हाइट टाइगर सफारी मौजूद है।

जी हां हम बात कर रहे है मुकुदपुर की जहां बादशाह अकबर द्वितीय का जन्म हुआ था। दरअसल जिस समय महाराज अजीत सिंह (सन् 1755-1809) रियासत की गद्दी पर बैठे उस दौर में उत्तरी भारत में मुस्लिम राजसत्ता अवसान की तरफ थी। ईस्ट इंडिया कम्पनी का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा था। सन् 1758 में दिल्ली का बादशाह शाह आलम (अली गौहर) ने पटना पर आक्रमण किया किन्तु जब उसने लार्ड क्लाइव (तत्कालीन गवर्नर जनरल) को सेना के साथ अपनी ओर आते हुए सुना, तब वह पटना की तरफ से हटकर रीवा राज्य में आ गया। महाराज अजीत सिंह ने शाह आलम को प्रश्रय दिया और मुकुन्दपुर की गढ़ी में बहुत आदर और सम्मान के साथ रखा। शाह आलम के साथ उनकी बेगम लाल बाई भी थीं, जो गर्भवती थीं। मुकुन्दपुर में ही 24 अक्टूबर सन् 1775 को अकबर द्वितीय का जन्म हुआ, जो आगे चलकर सन् 1806 में भारत का बादशाह बना। बादशाह शाह आलम अपनी बेगम को महाराज रीवा के संरक्षण में छोड़कर बक्सर की तरफ चला गया था। सन् 1762 में जब शाह आलम बक्सर से प्रयाग आया, तब महाराज रीवा ने उनकी बेगम तथा पुत्र को ससम्मान उनके पास भिजवा दिया था।

अकबर द्वितीय दिल्ली मुगल वंश का 18वाँ बादशाह था। वह शाह आलम द्वितीय का पुत्र था और उसने 1806-1837 ई् तक राज किया। उसके समय तक भारत का अधिकांश राज्य अंग्रेजों के हाथों में चला गया था और 1803 ई में दिल्ली पर भी उनका कब्जा हो गया। बादशाह शाह आलम द्वितीय 1769-1806 ई अपने जीवन के अन्तिम दिनों में ईस्ट इंडिया कम्पनी की पेंशन पर जीवन यापन करता था। उसका पुत्र बादशाह अकबर द्वितीय ईस्ट इंडिया कम्पनी की कृपा के सहारे नाम मात्र का ही बादशाह था। अकबर द्वितीय का लड़का और उसका उत्तराधिकारी बादशाह बहादुर शाह द्वितीय 1837-1858 ई भारत का अन्तिम मुगल बादशाह था।

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