जन-जागति में मैहर और विजय राघवगढ राजघराने हुये थे तबाह:

By Tejnews.com 2020-12-08 द बघेली     

मैहर के राजा रघुवीर सिंह 1909-1965 इस समय अल्प व्यस्क थे। इनके संबंधियों और कर्मचारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में विशेष रूप से भाग लिया। मैहर राज घराने के विजय राघवगढ के ठाकुर सरजूप्रसाद इस जन जागति के प्रधान थे। इनके नेतत्व में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने अच्छा संगठन किया। इतना ही नही इन लोागों ने दक्षिण की बडी सडक का पूर्ण अवरोध कर दिया और युद्ध की तैयारी में संलग्न हो गये। मैहर और विजय राघवगढ इनके केन्द्र स्थल थे।
अंगरेजों के उपर इस मसय विपत्ति के पहाड टूट रहे थे। वह भारत के सभी राजाओं महाराजाओं से सहायता की याचना कर रहे थे। उन्होने बघेलखण्ड की जन-जागति को दबाने के लिए महाराजा रघुराज सिंह से भी प्रार्थना की। महाराज रघुराज सिंह स्वयं अंग्रेजी राज सत्ता के प्रबंल विरोधी थे। किन्तु आपसी संधि के सिद्धांतों में बंधे होने के कारण उन्होने अंग्रेजो को सहायता देना ही अपना कर्तव्य समझा। 1914 के माघ के महीने में महाराज रघुराज सिंह ने 318 सवार 2582 पैदाल 16 गोलन्दाज और 2 नामी तोपें दीवान पांडे दीनबन्धु की अध्यक्षता में मैहर और विजय राघवग की जागति को दबाने के लिए रीवा से भेजीं।

स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों ने डअकर मुकाबला किया पर अंत में उनका प्रसिद्ध गोलन्दाज दयाराम मारा गया और मैहर का किला तोड दिया गया। अने सेनानी पकड लिये गये थे। उनमें मैहर के अल्पव्यस्क राजा रघुवीर सिह के काका भी थे। रघुवीर सिंह अध्ययनार्थ बनारस भेज दिये गये।

मैहर का ठिकाना नष्ट होने पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो ने विजय राघवगढ के ठाकुर सरजू प्रसाद की अध्यक्षता में अपना संगठन किया। फाल्गुन महीने में विजय राघवगढ पर भी चढाई की गई जिससे सेनानियों का जत्थ तितर-बितर हो गया और विजय राघवगढ की गढी भी धवस्त कर दी गई। मैहर और विजय राघवगढ पर महाराज रघुराज सिंह का शासन स्ािापित हो गया। विजय राघवगढ के ठाकुर सरजू प्रसाद ठिकाने के बाद कर दिये गये।

इस चढाई में मैहर और विजय राघवगढ से बहुत सा सामान प्राप्त हुआ जिसमें बाडा कसाव और कडक बीजुरी प्रसिद्ध तोपें भी थी। तोपें तो महाराज रघुराज सिंह ने अपने तोपखाने में रखवा लीं और बांकी सामान अंग्रेज कमाण्डर कर्नल हाइण्ड के पास इलाहाबाद भेज दिया।

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