बघेल रियासत के महाराज भाव सिंह संस्कृत के थे प्रकाण्ड विद्वान:

By Tejnews.com 2020-12-07 द बघेली     

रीवा रियासत के महाराज एक से बढकर एक विद्यान और ज्ञानी थे उसी में से एक है महाराज भाव सिंह। महाराज भाव सिंह की शिक्षा प्राच्य संस्कृत में हुई थी। महाराज भाव सिंह संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे। आपका रूझान आध्यात्म और धार्मिकता की तरफ ज्यादा था। इन्होंने ‘‘बघेलवंशवर्णनम्’’ के रचयिता कवि रूपणि शर्मा को राज्याश्रय प्रदान किया था। बालकृष्ण सूरि, किशोर, गोवर्धन बाजपेयी, लालमणि, औपगवि, कमलनयन आदि विद्वान इनके सभासद थे। दिल्ली सम्राट औरंगजेब से इनकी मित्रता थी।

महाराज भाव सिंह ने स्वयं ‘‘हौत्र कल्पद्रुम’’ नामक साहित्यिक ग्रन्थ की रचना की थी। महाराज भाव सिंह भगवान जगन्नाथ जी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने तीन बार जगन्नाथ स्वामी की यात्रा की और वहाँ से जगन्नाथ जी के विग्रह (मूर्तियाँ) लाकर मुकुन्दपुर, कोटर और रीवा (वर्तमान संस्कृत कालेज परिसर) में स्थापित करवाई थी। इनके शासन काल में महामृत्युंजय मन्दिर का निर्माण कराया गया था। रीवा किले में भी अनेक भवनों जैसे- लम्बा घर और मोती महल का निर्माण महाराज भाव सिंह के द्वारा कराया गया था।

महाराज भाव सिंह की 19 महारानियाँ थीं, जिनमें प्रमुख चित्तौड़ नरेश महाराज राजसिंह की पुत्री अजबकुँवरि थीं। महाराज भाव सिंह के समान महारानी अजबकुँवरि भी धार्मिक स्वभाव की थी। इन्होंने रीवा नगर के मध्य एक विशाल तालाब खुदवाया था; जिसका नाम रानी तालाब है। इन्होंने तालाब के पश्चिमी मेढ़ पर माँ शारदा का मन्दिर तथा तालाब के मध्य में शिव मन्दिर का निर्माण कराया था। इन्हीं के नाम पर ‘‘नृपरनियाँ’’ (निपनिया) मोहल्ला आज भी रीवा में है। महाराज भाव सिंह के कोई सन्तान नहीं थी। महाराज भाव सिंह ने (सन् 1660-1690) शासन किया था।

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