रागदारी के अलग-अलग रंगों से सजी शाम “तानसेन समारोह-2019”

By Tejnews.com 2019-12-20 PR     

ग्वालियर के तानसेन संगीत समारोह के दूसरे दिन की सायंकालीन सभा में भी सुरों के अलग-अलग रंग देखने को मिले।इस सभा में इंदौर के अब्दुल सलाम नौशाद का क्लेरोनेट वादन ग्वालियर के अभिजीत सुखदाने का ध्रुपद गायन चौन्नई के के. शिवरमन का मृदंग वादन और यू एसए से आए मोहन देशपांडे का खयाल गायन हुआ।

सभा का आगाज तानसेन संगीत महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ओर शिक्षकों के ध्रुपद गायन से हुआ। सभा की पहली प्रस्तुति के रूप में इंदौर के अब्दुल सलाम नौशाद का क्लेरोनेट वादन हुआ। पाश्चात्य संगीत में इस्तेमाल होने वाले इस वाद्य को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में इस्तेमाल करना बड़ी मेहनत और जोखिम का काम है, पर अब्दुल सलाम नौशाद इसे बड़ी सहजता से बजाते हैं। उन्होंने राग वागेश्री में वादन की शुरुआत की। इस राग में उन्होंने दो गतें पेश की। ं। इन गतों को बजाने में आपने अपने कौशल का बखूबी परिचय दिया। वादन का समापन राग मिश्र पीलू से किया।

शाम की सभा के दूसरे कलाकार थे ग्वालियर के ध्रुपद गायक अभिजीत सुखदाने। उन्होंने अपनी गायकी से एक अलग ही कालेज बनाया। अभिजीत ध्रुपद की डागर वाणी के प्रतिनिधि कलाकार हैं और पिछले 10 वर्षों से ग्वालियर में ध्रुपद केंद्र में गुरु शिष्य परंपरा के तहत ध्रुपद का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

वहारहाल, आपने अपने गायन के लिए राग मालकौंश का चयन किया। विविध लयकारियों के साथ बंदिश को बड़े ही सहज ढंग से पेश किया।। गायन को आगे बढ़ाते हुए आपने धमार में मालकौंश की ही रचना पेश की।

अगली प्रस्तुति में चेन्नई से आये विख्यात मृदंग वादक पद्म विभूषण उमायलपुरम के शिवरमन का ओजपूर्ण मृदंग वादन हुआ। कर्नाटक शैली का उनका वादन खूब पसंद किया गया। अरसे बाद ये पहला मौका था जब तानसेन समारोह में कर्नाटक संगीत को भी जोड़ा गया है। शिवरमन जी ने आदि ताल में अपना वादन पेश किया। सभा का समापन यू एस ए से पधारे पंडित मोहन देशपांडे जी के गायन से हुआ। उन्होंने अपने गायन के लिए राग चरुकेशी का चयन किया। रंजक प्रवृत्ति के इस राग को उन्होंने उतने ही रंजक अंदाज में पेश किया। अगली पेशकश में उन्होंने द्रुत तीन ताल में तराना पेश किया। गायन का समापन उन्होंने कबीर के भजन से किया।

Similar Post You May Like

ताज़ा खबर

Popular Lnks