11 सालों से अब तक नहीं हो पाया शहीद के गांव का विकास

By Tejnews.com 2017-10-30 रीवा रीजन     

मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट उप चुनाव का रण आखिरी दौर में पहुंच चुका है. सत्तापक्ष और विपक्ष मतदाताओं को रिझाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं.

सत्तादल विकास को मुद्दा बनाकर जीत का दावा कर रहा है तो विपक्ष विकास के दावे को कोरी कल्पना बता रहा है.

सतना जिले के एक ऐसे गांव की कहानी बता रहा है जो विकास के नाम पर 2006 से ही सुर्खियों में है. यह गांव इस बार भाजपा प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी का गांव है जहां सरकार के विकास के दावे कमजोर साबित हो रहे हैं.

दरअसल, सतना जिले का देउरा पंचायत एक बार 2006 में सुर्खियों में आया था, जब रामकरण मिश्रा नाम के सीआईएसएफ़ के जवान नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे.


गांव पहुंचने के बाद हर किसी ने शहीद को याद किया और परिवार के साथ गांव के विकास की खूब घोषणा की लेकिन ग्यारह वर्ष गुजर जाने के बाद न तो शहीद के गांव तक पहुंचने का रास्ता बन पाया और न ही स्टेच्यू. 2008 में एक तोरण द्वार बना लेकिन सड़क नही बनी.

अब ये गांव दोबारा सुर्खियों में है. सत्ताधारी दल भाजपा ने इस गांव के नेता शंकर दयाल त्रिपाठी को टिकट देकर विकास को मुद्दा बनाकर जीत का दावा कर रही, लेकिन इस पंचायत के दो गाँवो ने इस बार चुनाव में मतदान न करने का एलान कर रखा है. बकायदा जिला प्रशासन निर्वाचन आयोग के साथ साथ लोगो ने गांव में बैनर पोस्टर टांग रखा है. लोग गांव में नाकाबंदी तक कर रखी है.

लोगों की मने तो हर बार उनके साथ जनप्रतिनिधि छल कर रहे हैं. गांव में न बिजली है न सड़क. आंगनवाड़ी भवन कभी नही खुलता. स्कूल और पंचायत भवन का काम बरसों से अधूरा है.

सतना जिले में पहले रिमारी बरहना पंचायत के लोगों ने मतदान का बहिष्कार करने का एलान किया और अब भाजपा प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी के गृह गांव देउरा के मतदाताओं ने चुनाव के बहिष्कार करने का एलान कर दिया हैं.

Similar Post You May Like

ताज़ा खबर

Popular Lnks