पहली बार महिला कबड्डी को स्वर्ण पदक

By Tejnews.com Fri, Sep 29th 2017 अन्य खेलों     

भारतीय कबड्डी को बुल्दियों में पहुंचा कर सैफ खेलो में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाली दर्शना वाकडे किसी परिचय की मोहताज नही है। दर्शन नें दक्षिण एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कोलंबो में पहली बार महिला कबड्डी को स्वर्ण पदक दिलाया। बहु और बच्चे की मां होने के बावजूद दर्शना लगातार 20 वर्षो से नेशनल टीम में खेल रही है और अपने परिवार के भी बराबर ध्यान रख रही है।
हौशला से लबरेज दर्शना खेल को जीवन का महत्वूपर्ण अंग मानकर लगातार आगे बढती जा रही कबड्डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी दर्शना नें दक्षिण एशियाई खेलों मे श्रीलंका की राजधानी कोलम्बों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाया और टीम के साथ लक्ष्य की ओर बढती रही। दर्शना ने भारतीय टीम का प्रतिधित्व ऐसा किया कि सभी खिलाडी में उत्साह कम नही हुआ। सब के सामने एक ही लक्ष्य था टीम की टीम और स्वर्ण मे कब्जा करना। राष्ट्रीय खेल दिवस से दो दिन पूर्व 26 अगस्त 2006 को दर्शना ने विरोधी टीम के छकके छूडाते हुए भारतीय महिला कबडडी टीम में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता लिया। यह पहला मौका था जब भारतीय महिला ने देश को कबड्डी मे स्वर्ण दिलाया। यह विंध्य क्षेत्र के साथ पूरे देश के लिए मानो स्वप्न के साकार होने जैसा था कि रीवा की बहू दर्शना ने जो संकल्प लिया था वह पूरा हो चुका था और हिन्दुस्तान का तिरंगा कोलंबो मे लहरा रहा था।
रीवा के उपरहटी में रहता है वाकडे परिवार, दर्शना को पुत्रवत् स्नेह करने वाला ये हैं यशंवत राव वाकडे और शिक्षिका श्रीमती अर्चना वाकडे इनके साथ में है इकलौता पुत्र अखिल और धर्मपत्नी दर्शना वाकडे। 32 वर्षीय कबड्डी की अन्र्तराष्ट्रीय स्तर की खिलाडी दर्शना वाकडे की खेलो में शुरूआत बालीबाल से हुई लेकिन किसी कारण बस बालीबाल गेम छोडना पडा। इसके बाद दर्शना ने इन्दौर में अपनी माॅ और मौशी से विरासत में मिली कबड्डी खेल को आठवीं कक्षा से अपनाया और एक बार मैदान पकडा तो फिर आज तक पीछे मुडकर नही देखा। पहले विद्यालयीन, फिर महाविद्यालयीन और उसके बाद राष्ट्रीय ओपन खेल प्रतियोगिताओ के माध्यम से पिछले 20 वर्षो से लगातार नेशनल खेल है। आन्ध्रप्रदेश में जूनियर नेशनल फिर 1993-94 में विद्यालयीन स्तर पर सीनियर नेशनल इसके बाद महाविद्यालयीन स्रत पर आने पर लगातार सीनियर नेशनल मे जो भागीदारी शुरू हुई वह आज भी कायम है। दर्शन ने ताकत से नही बल्कि टेकनिक का प्रयोग करते हुए स्वर्ण पदक को हासिल करने में कामयाब हुई और दुनिया को बता दिया कि कबड्डी ताकत से नही बल्कि दिमाग से जीती जाती है।
विगत 20 वर्षो से कबड्डी टीम की कैप्टन श्रीमती दर्शना वाकडे बंगलौर, तिरूपति, पूना, मुम्बई, कनार्टक पंजाब, गुजरात, उडीसा, बिहार मे लगातार कबड्डी की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं मे शािमल हुई। पिछले 7 सालो से लगातार बेस्ट प्लेयर के खिलाब भी दर्शना के नाम रहे इसके अलावा विक्रम अवार्ड भी दर्शना के नाम है। दर्शना अपनी इन तमाम उपलब्धियों का श्रेय अपने पिता शशिकांत भागवत, माॅ श्रीमती वंदना भागवत और शादी के बाद ससुराल में प्रोत्साहन के प्रेरणाश्रोत बने ससुर यशवन्त राव वाकडे और मां श्रीमती अर्चना वाकडे को देती है।
दिसम्बर 2003 में दर्शना की शादी होने के तीन-दिन बाद ही मुम्बई में नेशनल खेलो के लिए बुलावा आ गया था और तब ससुराल वालों ने दर्शना को खुशी-खुशी मुबंई के लिए रवाना कर दिया। दर्शना के पति अखिल की मानंे तो शादी ही इसी शर्त पर हुई कि शादी बाद खेल पर पाबंदी नही होगी। लिहाजा जब पति अखिल ने यह जाना की वह नेशनल स्तर की खिलाडी है तो उन्होने खेलो को लगातार जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास किये और आज भी परिवार उन्हे लगातार प्रेरित कर रहा है। दर्शना के माता पिता भाई बहन के साथ ही ससुराल पक्ष भी उसे लगातार खेलने के लिए प्रेरित करता रहता है। छोटा बच्चा होने से कठिनाईयां कई सारी आती है लेकिन परिवारवाले उसे नजरअंदाज कर दर्शन की उपलब्धियों पर रोड़ नही बनते। मां वंदना भागवत के आंखों में अपनी बेटी की इस उपलब्धियों को बताते हुये खुश के आंसू भर आये तो वहंी सांस श्रीमती अर्चना वाकडे के बाद खुशी का इजहार कराने के शब्द ही नही है। दर्शना के ससुर यशवंत वाकडे भी बहु को हमेशा प्रेरित करते रहते है और उसे बेटे का दर्जा दे रखे है। उन्होने दर्शना को कभी बहु बेटी की तरह नही देखा बल्कि उसे बेटे की तरह रखने की कोशिश की है।
आत्म विश्वास से परिपूर्ण खुश मिजाज दर्शना अपने खेल के बदौलत देशभर से सैकडों महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र हासिल किये है। पूरा कमरा शील्ड और टाफियां से भरा हुआ है। दर्शना के भाई बहन भी उनकी इस उपलब्धि के कायल है। अब दर्शना का दूसरा संकल्प देश के लिए एशियाई और ओलंपिक खेलांे में भारत का प्रतिनिधित्व करना। इसके लिए दर्शना जी जान से मेहनत कर रही है। इसके अलावा कबड्डी को बढावा देने के लिए कई कोचिंग भी में दर्शना खेल के गुर सिखाती है।

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