वशीकरण यंत्र

By Tejnews.com 2016-11-10 धर्म-कर्म     

एक मंत्र जिसमे इतनी शक्ति होती है कि भंयकर शत्रु भी वशीभूत होकर प्यार करने लगता है शरीरिक व्यथा दूर होती है। पत्नी का कष्ट दूर होता है और चोरी गई वस्तु मिल जाती है। इतना ही नही विदेश गया प्रेमी भी शीघ्र लौट आता है और बंदी छूट जाता है। ‘‘ओम हीं श्रींकली चामुण्डा देवी स्वाहा’’ अथ पन्द्रहे के इस मंत्र कई खूबियां है।
पन्द्रहे के यंत्र से शत्रुनाश विधि- मदार के पत्ते पर 15-15 यंत्र रोजना लिखकर पत्ते के नीचे शत्रु का नाम लिखे और अग्नि मे जला दे तो शत्रु का नाश होता है। इस यंत्र को शुभ कार्य के लिए शुक्ल पद्वा मे उत्तम दिन से लिखना शुरू करना चाहिए। चमेली की कलम से उत्तर मुख बैठना चाहिए और यदि अशुभ कार्य के लिए लिखना हो तो अशुभ दिन कृष्ण पक्ष मे लोहे की कलम से लिखना चाहिए। जितने दिन यंत्र-लिखे उतने दिन ब्राम्हचर्य रहकर मूंग की दाल और चावल खाना चाहिए। लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए 2 हजार यंत्र लिखे और रोग दूर करने के लिए 6 हजार बार, इसी तरह बशीकरण के लिए 3 हजार, ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए 4 हजार, देवता प्रसन्न करने के लिए 5 हजार, व्यापार बढाने के लिए 4 हजार, परदेश गये हुये को वापस बुलाने के लिए 2 हजार, स्त्री से पुत्र उत्पन्न करने के लिए 5 हजार, खेती अच्छी करने के लिए 2 हजार, प्रेतबाधा दूर करने के लिए 2 हजार मंत्र की सिद्धी के लिए 15 हजार, शत्रु वश मे करने केलिए 2 हजार, विषनाश करने के लिए 25 हजार, राजा को प्रसन्न करने के लिए 4 हजार, अनहोनी करने के लिए 2 लाख यंत्र लिखे गेंहू के अंगारे मे यत्रों को मिलकर मछलियों को खिला देने से सम्पूर्ण कार्या की अवश्य सिद्धि होती है। शुक्रवार के दिन कर्पूर, बचकूट और मधु मिलाकर इस यंत्र को लिखे तो धन और प्राण दोनों को लेकर स्त्री चली आयेगी। यंत्रों पर विश्वास करना चाहिए न करने से विपरीत फल होने लगता है। पवित्र और एकान्त स्थान मे बैठकर यंत्रों को लिखी विधि पूर्वक पूजन कर ब्रहा्रचार्य धारण कर पृथ्वी में शयन करें। यंत्र मत्र की विधि विचार कर कर्म करने से शीघ्र फल देने लगता है

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