जवानों ने न्यौछावर कर दिए थे देश के लिए प्राण, इसके बाद बन गया सैनिकों का गांव

By Tejnews.com 2017-07-26 रीवा रीजन     

सतना। जुनून देश के लिए प्राण न्योछावर करने का, जज्बात देश के दुश्मनों को खदेडऩे का। सन 1999 में हुए कारगिल युद्ध में देश के जवानों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए और 'ऑपरेशन विजय' पर फतह हासिल की। कारगिल के युद्ध में सतना के सपूत भी शामिल थे। 26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना के जवानों ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए 'ऑपरेशन विजय' को सफलता पूर्वक अंजाम दिया था।

पाकिस्तान से भारतीय सीमा में घुसे घुसपैठियों से युद्ध के दौरान भारत ने 527 से अधिक वीर योद्धाओं की कुर्बानी दी थी। जिसमें सतना के सैकड़ों सपूतों ने योगदान दिया, 6 महानायक ऐसे भी रहे, जिन्होंने प्राण न्योछावर कर दिया। कारगिल में 1300 से ज्यादा वीर जवान घायल हुए थे।

सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया
शहादत को प्राप्त ज्यादातर जवान अपने जीवन के 30 बसंत भी नहीं देख पाए थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना के शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए रणबांकुरों पर सतनावासियों को गर्व है। कारगिल दिवस की 17वीं वर्षगांठ पर उन शहीदों को 'पत्रिका' का सलाम।

एक गांव के तीन शहीद
कारगिल युद्ध में जिले से 6 जवान शहादत को प्राप्त हुए थे। इसमें से तीन शहीद एक ही गांव चूंद के हैं। समर बहादुर सिंह (सिपाही), कन्हैया लाल सिंह (नायक) व बाबूलाल सिंह (नायक) के जज्बे की कहानी आज भी गांव के लोग सुनाते हैं। इस गांव को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है। ढाई सौ घर वाले इस गांव में करीब 400 लोग भारतीय सेना में हैं।

हर युद्ध में योगदान
देश की रक्षा के लिए जब-जब कदम आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी है, सतनावासियों ने कुर्बानी दी है। हर युद्ध में सतना के सपूतों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। देश के लिए अपने को बलिदान भी कर दिया। 1962 में चाइना वार, 1965 में इंडो-पाक वार, 1971 में इंडो-पाक वार, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन रक्षक व ऑपरेशन विजय में सहित देश के लिए युद्ध में रणबांकुरों ने योगदान दिया।

शहीद की संतान भी देश सेवा को आतुर
शहीदों के परिवार के लिए देशहित सर्वोपरि है। कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बेटे युद्ध में शहीद हुए। बावजूद उन्होंने परिवार के अन्य सदस्य को सेना में जाने से नहीं रोका। शहीद समर सिंह व कन्हैया लाल सिंह के बेटे भारतीय सेना के अंग हैं।

भारत मां की रक्षा के लिए ये भी हुए शहीद

- सुग्रीव (सिपाही) - इंडो-चाइना वार 1962

- बद्री प्रसाद (सिपाही) - इंडो-चाइना वार 1962

- वंशराज सिंह (सिपाही) - इंडो-पाक वार 1965

- राम पाल सिंह (सिपाही) - इंडोपाक वार 1965

- दुर्गा प्रसाद (सिपाही) - इंडो-पाक वार 1971

- छोटे लाल सिंह (सिपाही) - इंडो- पाक वार 1971

- लालजी सिंह (सिपाही) - ऑपरेशन मेघदूत

ये हैं कारगिल के वीर शहीद

- समर बहादुर सिंह (सिपाही) - चूंद, तहसील रामपुर

- कन्हैया लाल सिंह (नायक) - चूंद, तहसील रामपुर

- बाबूलाल सिंह (नायक) - चूंद, तहसील रामपुर

- केपी कुशवाहा (गनर) - महुला, मेहुती, सतना

- राजेन्द्र सेन (सिपाही) - करही मेदनीपुर

- शिव शंकर प्रसाद पांडेय (सिपाही) - कुआं, सतना

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