त्यौहार का महत्व

By Tejnews.com Sun, Jan 1st 2017 धर्म-कर्म     

भारतीय जीवन मे त्यौहारो का विशेष महत्व है हिन्दुओं मुसलमानो, सिक्खों ईसाईयो पारसियो सभी के अपने अपने त्यौहार है। इन त्यौहारो के सहारे हर धर्म के लोग अपने पूर्वजो के कारनमो और आदर्श जीवन और शिक्षाप्रद बातो को आये बरस दोहराते है इन अवसरो पर खुशियां मनाते है। धर्म ग्रन्थो को पढते है पुरूखों के आदर्श जीवन की बाते खुद सुनते है और अपनी संतान को सुनाते है। इस तरह सहज ही पुराने जमाने का इतिहास सभ्यता और संस्कृति हमारी आंखो के सामने आ जाते है। इसलिए त्यौहार मनाने का मतलब यह है कि जहां हम बहुत पुराने समय से चले आये इन त्यौहारो को मनाकर पुराने आदर्श जीवन और अच्छे कार्यो को दोहरा लेते है वहां इन त्यौहारो को मनाने का यह भी उद्देश्य है कि हम उन अच्छी-अच्छी बातो को आज के जीवन और रहन सहन तथा समय के अनुकूल बना लेने की भी कोशिश करते है।
हमारे जितने भी त्यौहार है उन सब के पीछे कोई- न कोई घटना है, कोई न कोई ऐसी बात है जिसके कारण हम उन्हे मानते है। जैसे विजय दशमी का दशहरा है। इस दिन राजा रामचन्द्र से लंका के राजा रावण पर विजय पाई थी। या यो भी कह सकते है कि भगवान रामचन्द्र सत्य के हामी थी और रावण असत्य और पाप का हामी था। भगवान ने असत्य और पा का नाश किया और इस तरह सत्य और धर्म की विजय हुई। तब से लेकर विजय दशमी भाारत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक बडी धूमधाम के साथ मनाई जाती है। मतलब यह कि हर त्यौहार हमे पूर्वजों के समय की याद दिलाता है और त्यौहार मनाते समय हर कोई शुद्ध मन के साथ उन पूर्वजों के आदर्श जीवन को अपने जीवन का लक्ष्य बनाता है। हमारे त्यौहारो मे बहुत से ऐसे है जो बरस भर मे बदलने वाले मौसम के साथ संबंध रखते है जैसे वसंत है वैशाख्ी है होली है। इसके बाद कुछ धर्म के साथ संबंध रखते है जैसे जन्माष्टमी, शिवरात्री रामनवमी, दशहरा, दीवाली, ईद आदि। लेकिन जिन दिनो इन त्यौहारो ंको मनाया जाता है उनमे भी इनका संबंध मौसम से हो ही जाता है। हमारे पूवर्जो ने त्यौहारो के अवसर ऐसे ढंग से नियत किये है कि वे बेमौसम न जान पडे। मिसाल के लिए दीवाली, दीवाली बरसात के बाद आती है बरसात मे लगातार पानी पढते रहने से घर घर मे सीलन हो जाती है मकानो मे छते दीवारे सब खराब हो जाती है दीवाली से पहले घरों मे सफेदी मरम्मत लिपाई पुताई की जाती है और उस खास दिन दिये जलाये जाते है। दिये जलाने से अशुद्ध वायु शुद्ध हो जाती है इसी तरह जन्माष्टमी का संबंध भगवान कृष्ण के जन्म से है किन्तु बरसात के दिनोे इसे मनाया जाता है। इसके बाद एमदम राष्ट्रीय पर्व है जैसे स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त, 2 अक्टूबर गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस 26 जनवरी। कुछ एक ऐसे भी त्यौहार है जिन्हे हमने अपने ही बुरे चलनो से बदनाम कर दिया है जैसे दीवाली और होली। इसके अतिरिक्त इन त्यौहारों के अवसर पर धनी-निर्धर छोटे बडे सभी एक ही सी खुशी के साथ मिलकर त्यौहार मनाते है। यह मिल जुलकर त्यौहार मनाने का कार्य हमे इस बात की याद दिलाता है कि हमे अपना सामाजिक संगठन मजबूत बनाना चाहिए। जो समाज केवल किसी एक ही वर्ग का होगा वह समाज मजबूत नही हो सकता। वह जो केवल एक गुट या जत्था होगा। समाज मे सभी वर्ग शामिल होने चाहिए। सभी वर्गो वाला समाज समूचे देश का कल्याण कर सकता है जहां का समाज अलग-अलग वर्गो अर्थात धनी निर्धन, छोटे बडे मे बंटा होगा वह समाज नष्ट हो जायेगा। इस बात बडा सबूत हमारा हिन्दू समाज है। महाभारत के बाद से हिन्दू समाज मे बुराईयां पैदा हुई हिन्दू समाज छूूत-अछूत, धनी-निर्धन, छोटे-बडे, मे बंट गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि समूचे देश की हालत बिगड गई। विदेशियो ने हामरे मत-भेदों के कारण हमे गुलाम बना लिया। देश मे जितनी बुराईयां पैदा हो रही है उन्हे त्यौहार दूर करने मे मददगार साबित होते हैं हम त्यौहार की खुशियां मनाने मे अपने को एक समझते है। इन त्यौहारो को आजाद भारत मे ऐसा रूप होना चाहिए कि सभी धर्मो के त्यौहार को सभी मनाएं।

Similar Post You May Like

  • किस दिशा में किस रंग की वस्तु रखने से मिलेगा विशेष लाभ

    किस दिशा में किस रंग की वस्तु रखने से मिलेगा विशेष लाभ

    रंग हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व रखते है। अगर रंग हो तो हमारी लाइप में बेरंग हो। जिसका कोई महत्व ही नहीं है। हर किसी को रंगीन दुनिया पसंद होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रंग का अपना ही एक महत्व है। हर रंग के हिसाब से हम अपने घर कोई न कोई चीज लाते है। चाहे वो सजावट की चीज हो या फिर किचन का कोई समान। आपको रंग के अनुसार बढ़ी ही आसानी से चीज मिल जाती है। वास्तु के अनुसार माना जाता है कि ह

  • यहां बंदी बनकर रही थीं सीता, आज भी गूंजती है हनुमान चालीसा की आवाज

    यहां बंदी बनकर रही थीं सीता, आज भी गूंजती है हनुमान चालीसा की आवाज

    यूं तो भारत व विश्व के प्रत्येक छोटे बड़े देवस्थल में श्रीराम एवं लक्षण जी के साथ सीताजी विराजमान हैं किंतु ऐसा देवस्थल जहां मुख्य देव प्रतिमा के रूप में सीता जी की पूजा अर्चना होती है विश्व में एक ही है. जहां सीता जी ने एक लंबा समय बिताया. आज हम आपको बताने जा रहे हैं सीता मंदिर के बारे जो श्रीलंका में है और वो अब पर्यटन स्थल बन चुका है. तमिल श्रद्धालू हिंदी न ही बोल पाते हैं और न ही समझ. फ

  • Karva Chauth 2017: इस समय होगा चांद का दीदार, इस विधि से पूजा कर सुने कथा

    Karva Chauth 2017: इस समय होगा चांद का दीदार, इस विधि से पूजा कर सुने कथा

    कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ हर महिला के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है। चांद को अर्ध्य और देखने के बाद ही वह पानी ग्रहण करती है। माना जाता है कि भगवान को अर्ध्य देने से पहले मां गौरी, शिव, गणेश और कार्तिकेय की अराधना करने का विधान है।पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्

  • कार्तिक मास आज से शुरु, भूलकर भी 4 नवंबर तक न करें ये काम

    कार्तिक मास आज से शुरु, भूलकर भी 4 नवंबर तक न करें ये काम

    धर्म डेस्क: कार्तिक मास में व्यक्ति के लिए अच्छी सेहत, उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए होता है। कार्तिक मास का नाम शास्त्रों में दामोदर मास नाम से भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार ये भी माना जाता है कि इस दिनों में पितरों को दीप दान देने से उन्हें नरक से मुक्ति मिलती है। यह माना जाता है कि इस मास में हर नदी का जल गंगा के समान पवित्र होता है। जो इस माह में डुबकी लगाते है उसे कुंभ म

  • कार्तिक मास में तुलसी लगाना होता है शुभ, इस दिशा में लगाने से मिलेगा धन-धान्य

    कार्तिक मास में तुलसी लगाना होता है शुभ, इस दिशा में लगाने से मिलेगा धन-धान्य

    समृद्धि और धार्मिकता का प्रतीक मानी जाने वाली तुलसी कई गुणों से भरपूर होती है। हरिप्रिया नाम से भी जानी जाने वाली तुलसी की हिंदू धर्म में काफी ज्यादा मान्यता है और लगभग हर धार्मिक अनुष्ठान में इसकी उपयोगिता रहती ही है। तुलसी को पूजनीय माना जाता है। तुलसी को पाप का नाश करने वाली माना गया है। इनका पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सभ

  • मंगल प्रदोष व्रत: इस पूजा विधि और कथा से करें भगवान शिव को प्रसन्न

    मंगल प्रदोष व्रत: इस पूजा विधि और कथा से करें भगवान शिव को प्रसन्न

    प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की त्रयोदिशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवन शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत व उपाय किए जाते हैं। इस बार 3 अक्टूबर, मंगलवार होने से मंगल प्रदोष व्रत का योग बन रहा है। धर्म शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस प्रदोष व्रत को करने से आपको शारीरिक समस्याओं और कर्ज से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे करें पूजा आचार्य के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त म

  • रविवार शाम को करें इनमें से कोई भी एक उपाय, नहीं होगी कभी पैसे की कमी

    रविवार शाम को करें इनमें से कोई भी एक उपाय, नहीं होगी कभी पैसे की कमी

    आपने ये तो सुना होगा कि शनिवार को पीपल के पेड़ को जल देने और दीपक जलाने से शनि का आर्शीवाद मिलता है और शनि की साढ़े साती से राहत मिलती है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि रविवार को भी पीपल के नीचे दीपक जलाने से कई लाभ होते हैं. रविवार को पीपल के नीचे दीपक जलाने से पद और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होती है. दिन छिपते समय रविवार को पीपल के पेड़ के नीचे चौमुखा दीपक जलाने से धन, वैभव और यश में वृद्धि ह

  • नवरात्र का आखिरी दिन, ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

    नवरात्र का आखिरी दिन, ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

    नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिरात्रि की पूजा करने का विधान है। सिद्धिदात्री देवी सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। देवी के इस अंतिम रूप को नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ व मोक्ष देने वाली दुर्गा माना गया है। माना जाता है कि केवल मां की पूजा सच्चे मन से करने से आपको पूरी 9 देवियों की कृपा मिलती है। ऐसा है मां का स्वरुप: यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा

  • नवरात्र का सातवां दिन: ऐसे करें मां कालरात्रि को प्रसन्न

    नवरात्र का सातवां दिन: ऐसे करें मां कालरात्रि को प्रसन्न

    नवरात्र के सातवे दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन का सभी नवरात्र क दिनों से ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि मां काली को सबसे भंयकर देवी कहा गया है। भंयकर होने के बावजूद मां काली बहुत ही ममताप्रिय, कोमल हदय वाली होती है। इतना ही नहीं सप्तमी की रात्रि को ‘सिद्धियों’ की रात भी कहा जाता है। ऐसा है मां कालरात्रि का स्वरुप शास्त्रों में मान्यता है कि

  • महालया आज: जानिए इसका मतलब, शारदीय नवरात्र गुरुवार से शुरु

    महालया आज: जानिए इसका मतलब, शारदीय नवरात्र गुरुवार से शुरु

    महालया मांगलिक पर्व दुर्गा पूजा से सात दिन पहले नए चांद के महत्व को दर्शाता है। माना जाता है कि इसके साथ ही त्योहारों की शुरूआत हो जाती है। जो कि आपकी लाइफ में सुख-शांति और समृद्धि लाती है। महालया यानी मां का आवाहन आज 19 सितंबर को है। इसमें मां दुर्गा का अवाहन किया जाता है। आपको बता दें कि शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू होकर 29 सितंबर तक चलेगी। साथ ही दशहरा 30 सितंबर को मनाया जाएगा। अश

ताज़ा खबर

Popular Lnks